नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः

वक्ता: एक उपनिषदिक् वाक्य है: नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः जो बलहीन है वो कभी भी अपने करीब नहीं पहुँच सकता| जो इतना डरपोक, मुर्दा और निर्बल है

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