शांति पाठ का महत्त्व

प्रश्न : उपनिषद के शुरू होने से पहले शांति-पाठ क्यों पढ़ाया जाता है ? वक्ता : ऐसा इसलिए क्योंकि तुममें और उपनिषदों में ज़मीन-आसमान का फासला

जीवन – अवसर स्वयं को पाने का

नीकौ हूँ लागत बुरौ, बिन औसर जो होय | प्रात भए फीकी लगे, ज्यौं दीपक की लोय || -नागरीदास वक्ता: ‘नीक’ माने अच्छा| जो अच्छा भी

हम गुम हुए- बुल्ले शाह

की जाणां की जाणां मैं कोई रे बाबा, की जाणां मैं कोई | टेक | जो कोई अन्दर बोले चाले, ज़ात असाडी सोई | जिसदे

पहला याद रखो,आखिरी स्वयं होगा

श्रोता १: यहाँ पर एक पंक्ति है: गावै तो ताणु होवै किसै ताणु | इसका अनुवाद लिखा था, ‘कोई उसकी शक्ति का गुणगान करे- ये शक्ति

भगवान क्या हैं ?

स्वतंत्रता क्या है? हम नहीं जानते। सत्य क्या है? हम नहीं जानते। शिक्षा क्या है? हम ये भी नहीं जानते। मैं कौन हूँ? ये तो बिल्कुल ही नहीं जानते। पर इन सब बातों के बारे में हमने कुछ-कुछ सुन रखा है और इनको मान लिया है। तो इस प्रश्न को अलग से लेकर के नहीं देखा जा सकता कि ‘भगवान् क्या है, सत्य क्या है ?’

अब लगन लगी की करिए – बुल्ले शाह

अब लगन लगी किह करिये, नाहं जी सकिये नांह ते मरिये | टेक |   तुम सुनो हमारे बैना, मोहि रात दिने नहीं चैना, हुण

1 2 3