न जानने में बड़ा जानना है

पूर्ण मदः पूर्ण मिदं
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शांति मंत्र को तार्किक मत समझ लीजियेगा, ये तो घोर अतार्किक है;
अतार्किक कहना भी बड़ी तार्किक बात हो गयी।

ये तर्क की सीमा के ही पार है, न तार्किक है न अतार्किक है।
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आप आमंत्रित हैं बोध सत्र में

दिनांक: 27 जुलाई, 2016
दिन: बुधवार
समय: शाम 6:30 बजे से

मन ने जो पकड़ा सब अधूरा, मन कहाँ जान पाएगा पूरा

जो असली है, वो तुम्हें दिया ही नहीं जा सकता।

वो तो तुम्हें अपनी मर्जी से, अपनी निष्ठा से, अपनी सहमति और श्रद्धा से खुद ही पाना होता है।
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श्री प्रशांत ‘मिथक भंजन यात्रा’ का दूसरा चरण धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में आरम्भ कर रहे हैं।

25 अप्रैल से।

कृपया अपनी जगह आरक्षित कर लें।

सत्य के सान्निध्य से बेहतर कोई विधि नहीं

गुरु जी कुछ बोल रहे हैं; जब बोल रहे हैं तब समझ में नहीं आ रहा है और गुरु जी विधि के रूप में एक ताबीज़ दे दें तो उससे ज़्यादा समझ में आजाएगा?

सत्संग से श्रेष्ठम विधि कोई होती नहीं।

चुप-चाप बैठो और सुनो, और उतने में सब हो जाता है।

और फिर जिसे न सुनना हो, बचना हो, उसके लिए हज़ारों विधियाँ हैं।
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श्री प्रशांत ‘मिथक भंजन यात्रा’ का दूसरा चरण धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में आरम्भ कर रहे हैं।

25 अप्रैल से।

कृपया अपनी जगह आरक्षित कर लें।

अमूल्य से निकटता ही मूल्यहीन का त्याग है

त्यागने के लिए, जिसे तुम त्याग रहे हो, उससे कहीं बड़ा कोई अवलंबन चाहिए- सहारा!

जब तक वह सहारा नहीं मिला, तब तक छोटे सहारे को कैसे त्यागोगे?

त्यागने की बात नहीं करो। उस बड़े को पाने की बात करो!

छोड़ना नहीं है, पाना है!

शिष्य कौन?

जो दिन-प्रतिदिन की छोटी घटनाओं से नहीं सीख सकता वो किसी विशेष आयोजन से भी सीख पाएगा, इसकी संभावना बड़ी कम है|

बुद्धिमान वही है जो साधारणतया कही गयी बात को, एक सामान्य से शब्द को भी इतने ध्यान से सुने कि उससे सारे रहस्य खुल जाएँ |

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