दूसरों की मदद का भ्रम

यदि मेरा काम ही यही है कि मैं दूसरों की मदद करता रहूँ, मुझे अपने आप से नज़र चुरानी है और लगातार दूसरों की ओर ही देखते रहना है, एक झूठ में जीना है मुझे, तो मेरे लिए ज़रूरी हो जाता है कि मेरे आस पास ऐसे लोग बने रहें जो मेरी मदद के आकांक्षी हों। और मुझे बहुत अच्छा लगेगा जब लोग मुझसे मदद मांगने आएँगे। कई लोग बिलकुल प्रसन्न हो जाते हैं जब तुम उनके पास मदद मांगने जाओ। जो तुम्हारी मदद मांगने से खुश होता हो, जिसको इस बात में ख़ुशी मिलती हो कि कोई मेरे पास माद मांगने आया, उसको इस बात से दुःख भी होगा कि लोग अब मेरे पास मदद मांगने नहीं आ रहे।
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

सम्बन्ध कैसे?

क्या हम ध्यान से देख नहीं सकते अपनी ज़िन्दगी के इन रोज़ की घटनाओं को? हम सब इस लायक हैं, हमारे दोस्त भी इस लायक हैं, हमारे माँ-बाप भी इस लायक हैं कि हम में आपस में एक स्वस्थ सम्बन्ध हो और निश्चित रूप से होनी चाहिए, पर क्या है? हमें इमानदारी से देखना पड़ेगा। अपने-आप से झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं है। क्यूँकी जीवन हमारा है, उसको बेहतर बनाने का ज़िम्मा भी हमारा ही है। जब तक हम स्वीकार ही नहीं करेंगे की बीमारी है तब तक बीमारी का इलाज कैसे होगा? हमारे माँ-बाप भी तो इंसान हैं और वो भी इस लायक हैं न कि उनके बच्चों से उनका एक अच्छा सम्बन्ध रहे? क्या हैं वो इस लायक? हैं कि नहीं हैं?
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आचार्य प्रशांत के साथ 26वां अद्वैत बोध शिविर आयोजित किया जा रहा है।

दिनांक: 26-29 नवम्बर
स्थान: शिवपुरी, ऋषिकेश, उत्तराखंड

आवेदन हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com

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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/

पक्षी, आकाश, नदी, और तुम

रविवार सुबह को बोधपूर्ण बिताने का एक बेहतरीन मौका !
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आप आमंत्रित हैं इस रविवार 15 नवम्बर, श्री प्रशांत के व्याख्यान में:

विषय: धर्म क्या है?
स्थान: महर्षि रमण केंद्र, लोधी रोड, नयी दिल्ली
समय: 9:45 am
वक्ता: श्री प्रशांत (http://www.advait.org.in/shri-prashant.html, http://hindi.prashantadvait.com/about/)
आयोजक एवं संपर्क: 09910685048

धर्म-सम्बंधित अपने प्रश्नों के समाधान के लिए ज़रूर आयें| अन्य उत्सुक जनों को भी साथ लायें, सबका स्वागत है |

आलस माने क्या?

आलस बड़ी चालाक चीज़ होती है | कोई भी फ़िज़ूल काम करने में तुम्हें कभी आलस नहीं आयेगा | तुमने कभी गौर किया है कि तुम्हें आलस किन कामों में, किन चीजों में आता है?

आलस ऐसा नहीं है कि अँधा है | खूब आँखें हैं उसके पास, बड़ा शातिर है | खूब चुन-चुन के आता है आलस | कभी देखा है तुम्हें आलस किन-किन चीजों में आता है?

आलसी-वालसी नहीं हो तुम | तुम बड़े परिश्रमी हो | जहाँ पर तुम्हारे स्वार्थ सिद्ध हो रहे होते हैं वहाँ तुम्हें कभी आलस नहीं आयेगा | खूब दौड़ लगा लोगे |

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