नव वर्ष का आरम्भ, आचार्य प्रशांत जी के संग || प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन (2019)

हर साल की तरह इस बार भी ,
नव वर्ष का स्वागत अद्वैत परिवार ने
बोध की दिशा में कदम बढ़ाते हुए रखा,
और इस महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए
दूर-दूर से आये आचार्य जी के प्रेमी व शिष्यों ने भाग लिया,
जो भलीभांति जानते थे
कि नव वर्ष का आरम्भ उसके साथ होना चाहिए
जो प्राथमिक है, और एक आनंदमय व बोधपूर्ण जीवन के लिए
अति -आवश्यक है।

जो आदमी जितनी मुस्कुराहट पहने घूम रहा हो, जान लेना कि भीतर उसके घोर व्यथा है

तुम्हारे जीवन में दुःख आएगा, तुम रो पड़ोगे। तुम्हारे जीवन से दुःख जाएगा, तो भी तुम रो पड़ोगे। सामान्य भाषा में इस दूसरे रोने को हम

रोया करो

अगर आँसू सच्चे हैं तो उनका संबंध उत्सव और आनंद से है, उनका संबंध जाते हुए दुःख से है । आँसूओं का अर्थ ये नहीं है कि तुम दुखी हो, आँसुओं का ये अर्थ भी हो सकता है कि तुम आनंदित हो । मुक्त अनुभव कर रहे हो, भीतर की जकड़ को छोड़ने के लिए । जैसे किसी ने कलेजा भींच रखा हो, और फिर ज़रा तुम तनाव मुक्त हो जाओ, ज़रा तुम आश्वस्त और स्वतंत्र अनुभव करो । और जिस चीज़ ने भींच रखा है, उसको तुम छोड़ दो, या वो तुम्हें छोड़ दे । ऐसा है आँसुओं का निकलना । कभी देखा है तनाव में तुम्हारा शरीर भी कैसा अकड़ जाता है? पाँव का अंगूठा यूँ मुड़ जायेगा, मुट्ठियाँ भिंच जाएँगी । देखा है? और जब तनाव जाता है, एक सहज सुरक्षा की आश्वस्ति उठती है, तो वो साड़ी जकड़ खुल जाती है, ज़रा विश्राम मिल जाता है ।

अस्तित्वगत रूप से खूबसूरत बात है आँसुओं का बहना । तुम्हारी मनुष्यता का प्रतीक है, पशु नहीं रोते । लेकिन सांस्कृतिक रूप से रोना एक वर्जना है, एक कल्चरल टैबू है । अस्तित्व नहीं कहता कि मत रोओ । समाज कहता है, संस्कृति कहती है । कि मत रोओ । और फिर चूंकि वो कहती है मत रोओ, तो रोने के विपरीत जो उसको लगता है उसपर महत्व रखती है । वो क्या कहती है? कि हर समय, तुम मुस्कुराते नज़र आओ । और ये बात भारतीय भी नहीं है, तुम राम को, कृष्ण को मूर्तियों में भी मुस्कुराता नहीं पाओगे । शिव की मुस्कराहट देखी है क्या? ये बात बड़ी पाश्चात्य है । यहाँ ऋषिकेश में जितने भी विदेशी मित्र घूम रहे हैं इनको देखना । इन्होंने मुस्कान चिपका रखी होती है । क्योंकि ये डरे हैं, आतंकित हैं, इन्हें रोने से बहुत डर लगता है । और रो ये भीतर रहे हैं । उस रूदन को, उस क्रंदन को,  छुपाने के लिए, ये क्या पहनते हैं ऊपर? मुस्कुराहट ।

आचार्य प्रशांत
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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

प्रेम में तोहफ़े नहीं दिए जाते, स्वयं को दिया जाता है

जहाँ प्रेम होता है, वहाँ लुक्का-छुप्पी नहीं होती। ऐसा नहीं होता कि ये एक विशेष चीज़ है, तुम्हारी है। विशेष हो कि निर्विशेष हो, जैसे हैं तुम्हारे हैं और खबरदार अगर तुमने ठुकराया। और फिर यह भी नहीं होता कि साल में एक दिन लाए हैं खीर तुम्हारे लिए, फिर तो साल में जो भी बनेगा, जिस दिन भी बनेगा तुम्हारा ही है।
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम

1.) अद्वैत बोध शिविर
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com par
या
संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

2.) आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

3.) बोधसत्र का सीधा ऑनलाइन प्रसारण
आवेदन हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com
या संपर्क करें:
श्रीमती अनुष्का जैन: +91 9818585917

4.) आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: अनुष्का जैन: +91 9818585917
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

सच क्या कभी तुम्हें भाएगा?

कई मायनो में योगभ्रष्ट, वियोगी से भी ज़्यादा अभागी होता है क्यूंकि वियोगी को तो अवसर मिला नहीं; योगभ्रष्ट को मिला और वो चूक गया। तुम यहाँ आए हो — अद्वैत में — मेरे समीप, ये सौभाग्य की भी बात है और बड़े से बड़ा खतरा भी है तुम्हारे लिए। सौभाग्य इसलिए क्यूंकि मौका है, अवसर है जान सकते हो, अपनेआप को पा सकते हो, और खतरा इसमें ये है कि ये ऊँची से ऊँची संभावना है, इससे अगर चूक गए, तो अब जिंदगी भर कुछ नहीं पाओगे। क्यूंकि जो उच्चतम तुम्हें मिल सकता था वो मिला, दैव्य मेहरबान हुआ, अनुग्रह हुआ, बारिश हुई; तुम्हीं भीग ना पाए। तो बढ़िया है, अच्छा है, कोई ख़ास ही घटना होगी, जो घटनी होती है। आमंत्रण सबको आते हैं; सब आमंत्रित नहीं हो पाते। तुम आमंत्रित हो रहे हो, सौभाग्य है।
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भक्ति योग एवं पुरुषोत्तम योग आचार्य प्रशांत के साथ
6 मार्च से आरम्भ
आवेदन भेजने हेतु: requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें
श्री अपार मेहरोत्रा: +91-9818591240
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

जीव के लिए ही मृत्यु है

देह होने का अर्थ ही यही है कि समस्त जीवन का एक ही औचित्य रह जाएगा: मौत से बचना, क्यूंकि जीवन की निष्पत्ति मात्र मृत्यु ही है देह के लिए। देह और कहीं को जा ही नहीं रहा, देह सिर्फ़ मौत की ओर जा रहा है और आप मरना नहीं चाहते। अब आप जो कुछ भी करोगे, आप की सांस-सांस में सिर्फ़ मौत का भय होगा। आप अपने आस-पास के संसार को देखिए, उनकी गतिविधियों को देखिए, आप पाएँगे कि सब कुछ सिर्फ़ मौत के भय से चालित है; आप दुनिया के विस्तार को देखिए, आपको उसमें सिर्फ़ मौत का विस्तार दिखाई देगा।
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29वां अद्वैत बोध शिविर
24 से 27 फरवरी, शिवपुरी, ऋषिकेश
आवेदन भेजने हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com पर

अन्य जानकारी हेतु संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

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