सहजता आचरण-बद्ध नहीं

मान लो गाली आयी और ठीक उसी स्थिति में सब कुछ जानते हुए, एक सहज प्रतिक्रिया निकलती है, एक सहज और वो कुछ भी हो सकती है। ये भी हो सकता है कि तुम वहाँ से चल दो, ये भी हो सकता है कि तुम ध्यान ही ना दो और ये भी हो सकता है कि तुम उसका गला पकड़ लो। सब कुछ संभव है।

मैं कोई आदर्श नहीं

मन कहता है कि बस मैं यह जान लूँ कि किसी और ने क्या किया है और अपने जीवन को वैसा बना दूँ। कुछ नया करने की आवश्यकता कहाँ है? अतीत में जो कुछ हुआ है, दौहराते चलो और तुम्हें बड़ा मज़ा आता है, यह बोलने में कि वह मेरा रोल मॉडल है और तुम यह नहीं देखते कि रोल मॉडल बनाते ही तुमने जीवन का नाश कर दिया।

कैसे जानूँ कि मैं सही हूँ?

तुम्हें कैसे पता कि सही और ग़लत जैसा कुछ होता भी है? क्या तुम ये नहीं जानते हो कि जो बात एक देश में सही है वो दूसरे देश में ग़लत है? क्या तुम नहीं जानते कि एक ही जगह पर जो आज सही हैवो कल ग़लत था? क्या तुम ये नहीं जानते हो कि एक धर्म में जो बात सही है वो दूसरे धर्म में ग़लत है?

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