अभिनय का मतलब नकली होना नहीं है

आज तक गुस्सा कर के कोई खुश नहीं हुआ| नफ़रत कर के किसी को आनंद नहीं अनुभव हुआ| तुम खुद नहीं चाहते कि तुम्हें गुस्सा आए| तुम खुद नहीं चाहते तुम नफ़रत करो| ये सब चीज़े खुद अपने आप हट जाएँ क्योंकि तुम खुद इनको नहीं चाहते हो| पर तुम इन्हें पालते हो| क्यों? मन में वैहम गया है कि गुस्सा करने से मेरी अहमियत बढ़ती है| मन में एक वहम बैठ गया है कि नफ़रत करना ज़रूरी है अगर मुझे अपना प्यार सिद्ध करना है| तुम जानते हो हम नफ़रत अक्सर क्यों करते हैं? क्योंकि हम किसी को अपना प्यार सिद्ध कर रहे होते हैं|
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दुःख में याद रहे, सुख में भूले नहीं

जब कहा जाता है कि योगीजन समय के पार देखना शुरू कर देते हैं, त्रिकाल दर्शी हो जाते हैं, तो उसका मतलब समझिए| उसका मतलब यही होता है कि समय उनको बेवकूफ नहीं बना पाता| उसका मतलब ये होता है कि वो द्वैत के दोनों सिरों को अलग अलग नहीं देखते, एक साथ देखते हैं|

समझ रहे हो बात को?

वो हँसते हुए चेहरे में आँसू देख लेते हैं और जिन आँखों में आँसू  हैं उन में हँसी भी देख लेते हैं| उन्हें पता है कि ये सब क्या चल रहा है? समझ रहे हो? उठती हुई लहर में वो गिरती हुई लहर देख लेते हैं| लहर में समुद्र, और समुद्र में सारी लहरें एक साथ देख लेते हैं| रात को देखते हैं तो उन्हें दिखाई पड़ता है कि दिन है और दिन को देखते हैं तो रात को भूल नहीं जाते हैं| तमाम वैविध्य के पीछे मन की जो मूल वृति है वो उनके समक्ष सदा प्रकाशित रहती है, और वो बह नहीं जाएँगे , वो भूल नहीं जाएँगे|

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कल्पनाएँ ही आलस्य हैं

मन के भागने को ये मत समझ लेना कि वो कुछ पाने जा रहा है कहीं। मन हमेशा, कुछ छोड़ के कहीं और जा रहा होता है। देखो, जाने के दो तरीके होते हैं ना? घर से निकले हो, तो एक तो ये कि मैं बाज़ार से कुछ लेने जा रहा हूँ, मुझे कुछ पाने जाना है कहीं। और दूसरा तरीका क्या होता है, कि घर से लड़ाई हो गयी तो मैं घर छोड़ के जा रहा हूँ। मैं कहीं को नहीं जा रहा, मैं बस घर छोड़ के जा रहा हूँ। ये दो तरीके होते हैं ना? घर से निकलने के।

मन हमेशा दूसरे तरीके से निकलता है, घर से। भ्रम ये होता है कि कुछ पाने जा रहा है। तुम्हें, भ्रम ये होता है कि मन कहीं जा रहा है। तो वो कुछ पायेगा, उसको तुम इच्छाओं का नाम देते हो, कि इच्छाएँ हैं, इसलिए उधर को दौड़ रहा है। नहीं। इच्छाएं भ्रम हैं। मन सिर्फ दौड़ इसीलिए दौड़ रहा होता है, क्योंकि जो रिएलिटी है, वास्तविकता है, उसमें नहीं जीना चाहते। और वो भी तुम्हारी ट्रेनिंग दे दी गयी है। ऐसा नहीं है कि छोटा बच्चा नहीं जीना चाहता या कि एक इंटेलीजेंट आदमी नहीं जीना चाहता। तुम नहीं जीना चाहते क्योंकि तुम्हारी ट्रेनिंग थोड़ी सी गलत हो गयी है।

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