आलस की समस्या और काम में मन न लगना || आचार्य प्रशांत (2018)

बहुत सारी चीज़ें बदलनी पड़ती हैं, छोड़नी पड़ती हैं।

सख़्त निर्णय लेने पड़ते हैं। 

तुम्हारी उम्मीद अगर यह है कि ज़िंदगी वैसी ही चलती रहे, जैसी चल रही है, और साथ ही साथ मुक्ति भी मिल जाये, तो तुम मुक्ति इत्यादि को भूल जाओ। 

जैसी ज़िंदगी चला रहे हो, चलाओ।

 जीवन बोझ क्यों?

समझ के बिना उस ऊर्जा को दिशा नहीं दी जा सकती| जिन भी लोगों को जीवन में उत्साह चाहिए, एनर्जी चाहिए, उन्हें उत्साह की फ़िक्र छोड़ देनी चाहिए और समझने की फ़िक्र करनी चाहिए। उनको ये देखना चाहिए ध्यान से कि, ‘’क्या मैं समझ रहा हूँ कि मेरे साथ क्या हो रहा है? क्या मैं ठीक-ठीक समझ पाया हूँ कि मैं क्या कर रहा हूँ? मेरे मन में क्या चल रहा है, क्या मुझे पता है ठीक-ठीक?’’ आप आलस की फ़िक्र छोड़ ही दीजिये, आप बस ये देखिये कि, ‘’मैं जो कर रहा हूँ, मुझे उसकी समझ कितनी है|’’
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
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श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
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