निष्ठा-किसके प्रति?

‘एक’ होना काफ़ी है; एक निष्ठ होना काफ़ी है। वो ‘एक’ कुछ भी हो सकता है, नाम से। वो नाम कुछ भी हो सकता है। इसीलिए, भारत में लाखों-करोड़ों इष्ट देवता रहे। क्या फ़र्क पड़ता है कि तुमने किसको अपना इष्ट बनाया? हाँ, इस बात से जरूर फ़र्क पड़ता है कि जिसको इष्ट बनाया, समर्पण पूरा रहे। मन उसके रंग में पूरा ही रंग जाए। फिर वहां पर दो फाड़ नहीं होना चाहिए, कि थोड़ा इधर और थोड़ा उधर। फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा सर किसके सामने झुका। पर जब झुके, तब पूरा ही झुक जाए। फिर उसमें आना-कानी नहीं होनी चाहिए। फिर उसमें कुछ बचा कर नहीं रखना। फ़र्क नहीं पड़ता कि तुमने किस नदी में विसर्जित किया। बात यह है कि पूरा विसर्जित होना चाहिए। फिर यह न हो कि तुमने चुपके से कुछ बचा कर रख लिया।
—————–
हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: वी.एन.ए रिसोर्ट, ऋषिकेश

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
—————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

बाहरी प्रभावों से मन डगमगाता क्यों है?

दूर कहीं रोशनी है। वो जहाँ तुम खड़े हो, वहाँ हल्की सी दिखाई दे रही है, उसकी बस एक झलक मिल रही है। तुम उसकी तरफ़ दो तीन कदम बढ़ाओ तो क्या होगा? वो रोशनी थोड़ी और तेज़ होगी। चार कदम और बढ़ाओगे तो क्या होगा? वो रोशनी और तेज़ होगी। पर उसकी ओर कदम बढ़ाना होगा और जैसे-जैसे कदम बढ़ाते जाओगे, वैसे-वैसे तुम्हें यकीन होता जाएगा कि, ‘’हाँ रौशनी सच्ची है।‘’ पर उसकी ओर कदम तो बढ़ाओ। एक कदम से अगले कदम की ताकत मिलेगी। पहला जो कदम है, वो तो डरते-डरते ही रखना पड़ेगा क्योंकि रोशनी हल्की है, डरोगे। पहला जो कदम है, वो तो टटोल-टटोल के रखना पड़ेगा। लेकिन जैसे-जैसे कदम बढ़ाओगे, तुम पाओगे कि प्रकाश बढ़ता जा रहा है, तीव्र होता जा रहा है।
—————–
आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में 29 वां अद्वैत बोध शिविर आयोजित किया जा रहा है।
स्थान: वी.एन.ए रिसोर्ट, ऋषिकेश
तिथि: 24-27 फ़रवरी

अन्य जानकारी हेतू सम्पर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

श्री कुंदन सिंह: +91 – 9999102998
—————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

दुनिया से प्रभावित क्यों हो जाता हूँ?

मन की एक स्थिति वैसी भी हो सकती है कि जिसमें कोई विषय उसके लिये महत्वपूर्ण ना रह जाए। मन अपने आप में समा जाए। मन कहे जितने भी विषय हैं, उन सबकी प्रकृति एक है; वो आते हैं जाते हैं। मुझे उनमें से कोई भी महत्वपूर्ण लगता नहीं क्योंकि जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, वो मेरे भीतर ही है। ना अच्छा महत्वपूर्ण है, ना बुरा महत्वपूर्ण है; जो महत्वपूर्ण है वो हमने पा लिया है, तो अब प्रभावित क्या होना।

अब पूरा खेल तुम्हारे सामने चलता रहेगा और तुम उसके मध्य में अनछुए से बैठे रहोगे। तुम्हारे चारों तरफ़ जैसे नदी बह रही हो और तुम उस नदी के केंद्र में बैठी हो और पानी तुम्हें स्पर्श ना कर पा रहा हो। ऐसी स्थिति हो जाएगी।
—————
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

चलो ज्ञान में, पर स्थित बोध में रहो

मन को डुबोया या ये जाना कि मन तो डूबा हुआ है ही। मेरी एक-एक कोशिश उसको बस अलग करती है, डूबने से। उसके स्त्रोत से उसको दूर करती है, वरना मन तो डूबा हुआ है ही। मेरी एक-एक कोशिश, उसको बस अलग करती है। आपकी कोशिश जो है, कुछ भी करने की, भले वो डूबोने की कोशिश हो, आपकी कोशिशें ही तो बाधा है।
————–
प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
__________
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

जीवन रूखा-सूखा

‘इधर और अभी’ आपको पसंद है नहीं। यहाँ एक बातचीत चल रही है और आपमें से कई लोग होंगे जो, ‘इधर और अभी’ में नहीं हैं। वे कहीं और हैं। भविष्य की कल्पनाओं में, अतीत की स्मृतियों में, क्योंकि वह बड़ा आकर्षक लगता है। जो ‘है’, वह कभी आकर्षक नहीं लगता। और लगे कैसे? उसमें डूबना पड़ेगा, उसे समझना पड़ेगा, समझने के लिए ध्यान देना पड़ेगा, ध्यान देने के लिए कल्पनाओं से मुक्त होना पड़ेगा और जब तुम इतनी कल्पनाओं में हो तो वर्तमान में आओगे कैसे?

जो सपने देख रहा हो उसे वर्तमान दिखाई देता नहीं है।
नतीजा? एक बोरिंग वर्तमान। जीते तुम सदा वर्तमान में ही हो; मन सदा भविष्य में है।
————–
प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
__________
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

1 2 3 8