आदर्श जीवन कैसा हो?

पेड़ के पास कोई आदर्श है? तुम पेड़ को सिखा सकते हो कि इसी तरीके से आगे बढ़ना है – यहीं से ही शाख फूटेगी, और फिर वहाँ से प्रशाख फूटेगी। और ठीक इतनी पत्तियाँ आएँगी तेरे ऊपर क्योंकि यही एक आदर्श संख्या है। पेड़ को बता सकते हो? बोलो?

वहाँ तो जो होता है, उसमें एक अिनयंत्रण है, एक अव्यवस्था है, एक अराजकता है। जो बड़ी सुन्दर है। पूरी नहीं है वो भी, क्योंकि पेड़ उड़ नहीं सकता। एक आदर्श तो उसको भी पता है, क्या? कि जीना जड़ों में ही है, जीना जमीन पर ही है। पेड़ बोलेगा भी नहीं। कुछ बातों से वो भी सीमित है। आदर्श माने सीमा। लेकिन फिर भी पेड़ के पास, इससे (टेबल) तो ज़्यादा आज़ादी है ना?

आदर्शवादी मत बन जाना। क्यों चाहिये आदर्श? जब प्रतिपल तुम्हारे पास बोध है, जब तुम देख सकते हो, समझ सकते हो, तो उसके सहारे जियो ना! आदर्शों का सहारा क्यों चाहिए? गाड़ी चलाते हो तो आँख से चलाते हो या स्मृति से चलाते हो? आदर्श माने, स्मृति से जीना। गाड़ी कैसे चलाते हो? अभी सामने जो होगा, उसको तत्काल एक समुचित उत्तर देंगे

आचार्य प्रशांत
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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

जिसने अपना ख़याल खुद रखा वही पाएगा कि गहरे से गहरा नुकसान कर लिया।

कुछ भी संयोगवश नहीं है। पाँच उँगलियाँ भी हैं तुम्हारी, तो पाँच ही होनी थी, छह नहीं हो सकती। पूरी जो शरीर की विकास प्रक्रिया

आदमी की होशियारी किसी काम की नहीं

हम बड़े खुश होते हैं कि आदमी की पहली उपलब्धि थी ‘आग’ और फिर हम गिनते हैं ‘पहिया’ फिर हम गिनते हैं ये और वो। और आजकल हम गिनते हैं कि आखरी आदमी की बड़ी उपलब्धि क्या है, ‘इन्टरनेट’। हमें ये मानना पड़ेगा ये सब विकास नहीं हुआ है, गहराई से देखें तो ये पतन हुआ है। बहुत अजीब लगेगा। हमारे मन के सारे सहारे गिर जाएँगे। हमने जिन तरीकों से इतिहास को देखा है, अपने आप को देखा है, जीवन को देखा है, सब गिर जाएगा, हमारे सारे आदर्श बौने दिखाई देंगे। जिनको हमने देवता समझा है, पता चलेगा कि वही तो राक्षस थे हमारे।

आचार्य प्रशांत
आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
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समस्याओं का सामना कैसे करें?

मन ऐसा तैयार करो कि वो हर स्थिति को देख ले; पूरा देखले; पार देखले। और फिर कहीं से भागेगा नहीं वो। वो सामना ही करता है। कुछ पड़ा नहीं रहने देता। तो तुम तैयार करो, साफ़ रखो। उसके बाद एक अद्भुत घटना और भी घट सकती है। वो ये कि तुम्हें किसी परिस्थिति को हल करना ही न पड़े। तुम्हारी आहट भर से परिस्थिति खुद हल हो जाए। तुम्हारी आहट भर से परिस्थिति खुद हल हो जाए। तुम्हारे आस पास समस्याएं, माया भटके ही न। नज़र तुम्हारी इतनी तेज़ हो कि देखने भर से जितना अज्ञान है, सब घुल जाए। तुम जिस कमरे में बैठे हो, अपनेआप वहाँ का माहौल ऐसा हो जाए कि अब यहाँ कोई टुच्ची बात हो ही नहीं सकती। तुम जिस घर में हो, उस घर की तबियत बदल जाए। वो सब अपनेआप होने लगेगा।
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम

1.) अद्वैत बोध शिविर
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com par
या
संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

2.) आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स
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या
संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

3.) बोधसत्र का सीधा ऑनलाइन प्रसारण
आवेदन हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com
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श्रीमती अनुष्का जैन: +91 9818585917

4.) आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: अनुष्का जैन: +91 9818585917
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

सच क्या कभी तुम्हें भाएगा?

कई मायनो में योगभ्रष्ट, वियोगी से भी ज़्यादा अभागी होता है क्यूंकि वियोगी को तो अवसर मिला नहीं; योगभ्रष्ट को मिला और वो चूक गया। तुम यहाँ आए हो — अद्वैत में — मेरे समीप, ये सौभाग्य की भी बात है और बड़े से बड़ा खतरा भी है तुम्हारे लिए। सौभाग्य इसलिए क्यूंकि मौका है, अवसर है जान सकते हो, अपनेआप को पा सकते हो, और खतरा इसमें ये है कि ये ऊँची से ऊँची संभावना है, इससे अगर चूक गए, तो अब जिंदगी भर कुछ नहीं पाओगे। क्यूंकि जो उच्चतम तुम्हें मिल सकता था वो मिला, दैव्य मेहरबान हुआ, अनुग्रह हुआ, बारिश हुई; तुम्हीं भीग ना पाए। तो बढ़िया है, अच्छा है, कोई ख़ास ही घटना होगी, जो घटनी होती है। आमंत्रण सबको आते हैं; सब आमंत्रित नहीं हो पाते। तुम आमंत्रित हो रहे हो, सौभाग्य है।
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भक्ति योग एवं पुरुषोत्तम योग आचार्य प्रशांत के साथ
6 मार्च से आरम्भ
आवेदन भेजने हेतु: requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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