सम्मान और ज़िम्मेदारी माने क्या?

पति बोलते हैं पत्नियां बड़ा डोमिनेट कर लेती हैं। कोई पत्नी तुम्हें डोमिनेट कर सकती है, तुम्हारे मन में अगर उसकी बॉडी का लालच न हो तो? तुम उसकी बॉडी के पीछे भागते हो, उसी के कारण वो तुमको नाच नचा देती है! और कोई हथियार नहीं है उसके पास। बस यही हथियार है कि तुम्हारे मन में लालच है कि किसी तरह इसका शरीर मिल जाये। और वो इतना नचाएगी तुमको, इतना नचाएगी कि मर जाओगे! उसको तुम्हारे पैसे का लालच है, तुम्हें उसके शरीर का लालच है। दोनों एक दूसरे को नचा रहे हो, फिर दोनों रोते हो! घर-घर की यही तो कहानी है, और क्या चल रहा है? मरी से मरी औरत समर्थ से समर्थ आदमी पर राज करती है!
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आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में 31वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य जी के सानिध्य में रहने का और दुनियाभर के दुर्लभ शास्त्रों के इस अनूठे अवसर को न जाने दें।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com par
या
संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
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जो जानता हूँ उस पर अमल क्यों नहीं कर पाता?

अपने ही नकली चेहरे के प्रति विद्रोह कर पाना ज़रूरी तो बहुत होता है, पर ज़बरदस्ती नहीं हो सकता।
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अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

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जागरण न स्वप्न न सुषुप्ति न तुरीया

जो ज्ञान, ज्ञाता, ज्ञेय से भी हटकर के है, और जो जाग्रति, सुषुप्ति, और स्वप्न से भी हटकर के है। जो ‘होने’ से ही हटकर के है, उसे ‘तुरीय’ कहते हैं, तुरीय माने ‘चौथा’। जो ‘होने’ से ही हटकर है, जो ‘है ही नहीं’। जो है ही नहीं, पर ‘होने’ को देखता है। जिसके ऊपर आप ‘है’ की संज्ञा नहीं लगा सकते, पर जो समस्त ‘होने’ को जान पा रहा है- उसे कहते हैं ‘तुरीय’।
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अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

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माफ़ करने का क्या अर्थ है?

बेहोशी का तो एक ही प्रायश्चित है, क्या? ‘होश।’ वास्तविक क्षमा का अर्थ यह है कि “मैं तेरी कही हुई बात को, या फिर तेरे करे हुए कुकर्म को, गंभीरता से ले ही नहीं रहा।” क्षमा का अर्थ तो यह हो गया, जो आम तौर पर हम ले लेते हैं कि, “तूने जो करा, उससे मुझे चोट लगी। जा तुझे माफ़ करता हूँ। तूने मुझे चोट दी। मैं तुझे माफ़ करता हूँ।” ना। समझदार आदमी कहता है कि ‘तूने मुझे चोट दी ही नहीं।’ यह हुई वास्तविक क्षमा।
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

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कहानी तीन हाथों वाले बन्दर की

मैं तुम्हें कुछ नया नहीं दे पाऊँगा, हाँ, जो तुम्हारे पास है, दोहरा रहा हूँ,उसको हटा सकता हूँ, तुम्हारी बीमारियों को हटा सकता हूँ। स्वास्थ्य नहीं दे सकता, स्वास्थ्य तुम्हारा अपना है और पूरा है। मात्र कल्पना ही करके देख लो कि कैसा होगा वो दिन, जब तुम्हें कहीं पहुँचने की जल्दी, कुछ पा लेने की ख्वाइश हो ही न। ऐसा लगे, जैसे जितनी ख्वाहिशें थी, वो सब पूरी हो ही गयी हैं, इतनी पूरी हुई हैं कि अब कोई ख्वाहिश बची नहीं। कैसा होगा वो दिन? और अगर उसकी कल्पना ही इतनी मधुर है, तो वो दिन कैसा होगा? जिसकी सिर्फ कल्पना ही इतना संतोष देती है तो दिन कैसा होगा? लेकिन वो दिन दौड़ भाग करके नहीं आएगा, वो दिन चेष्टाएँ करके नहीं आएगा। वो दिन थम करके आएगा, वो दिन ज्ञान में आँख खोल करके आएगा, समझ करके आएगा।
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

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