एकाग्रता क्यों नहीं बनती? || आचार्य प्रशांत (2017)

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व्यर्थ चीज़ों को जीवन से कैसे हटाएँ? || आचार्य प्रशांत, आत्मबोध पर (2019)

जीवन को साफ़-साफ़ देखकर के जब तुम समझने लगते हो कि कौन-सा काम तुम्हारी सच्च्चाई से निकल रहा है, और कौन-सा काम तुम्हारी कमज़ोरी से, या तुम्हारे डर से, या तुम्हारे लालच से निकल रहा है, तो उससे एक आग पैदा होती है, जो जीवन की सब अशुद्धताओं को जला देती है।  

क्या पुनर्जन्म होता है? || आचार्य प्रशांत (2018)

तुम जो कुछ हो , उसका कोई पुनर्जन्म नहीं होता।

तुम्हारा कोई पुनर्जन्म नहीं होता।

जहाँ तक आत्मा के पुनर्जन्म की बात है, वो पुनर्जन्म नहीं है।

वो खेल है, वो लीला है।  

कैवल्य क्या है? || आचार्य प्रशांत (2018)

‘कैवल्य’ का अर्थ है – जहाँ भी हो, जैसे भी हो, जिससे भी घिरे हो, तुम आत्मनिष्ठ रहो।

जो एक सत्य है, जो केवल सत्य है, उसमें स्थापित रहो।

तुम्हारी परम वरीयता, ‘परम’ ही रहे।

परमात्मा ही परम वरीयता रहे तुम्हारी।

ध्यान की सर्वोत्तम पद्धति|| आचार्य प्रशांत (2018)

जब शांति की गहरा तरफ़ प्रेम होता है, तो अशांति हटाने के लिए आदमी खुद ही विधियाँ खोज लेता है।

यही ‘ध्यान’ है।  

जब शांति के लिए गहरा प्रेम है, तो अशांति हटाने के लिए आदमी खुद ही उपाय खोज लेता है।

वही ‘ध्यान’ की विधियाँ हैं।

कालातीत योग और समकालीन चुनौतियाँ || आचार्य प्रशांत, योग पर (2018)

वास्तविक योग क्या है?

चित्त की वृत्ति का निरोध वास्तविक योग है!

जो तुम्हारी आदतें हैं, जो तुम्हारी वृत्तियाँ हैं, उनसे तुम आज़ाद हो जाओ, उनसे तुम्हें मुक्ति मिल जाए – यही मोक्ष है।

यही योग है।

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