प्रशंसा – स्वास्थ्य का भ्रम

निंदक मेरा जनि मरु, जीवो आदि जुगादि ।  कबीर सतगुरु पाइये, निंदक के परसादि ॥ वक्ता: स्वास्थ्य स्वभाव है और स्वस्थ होने का मतलब होता

किस दिशा जाऊँ?

पाने की इच्छा हीनता के भाव से निकलती है| इच्छा पूरा होना चाहती है, ख़त्म हो जाना चाहती है, जो असंभव है| कुछ भी पा कर जीवन की रिक्तता ख़त्म नहीं होती| वो जो हीन नहीं है, वो तुममे ही सोया हुआ है| उसे जगाओ, उसकी तरफ ध्यान दो|

1 2 3 4 5 6 10