किस दिशा जाऊँ?

पाने की इच्छा हीनता के भाव से निकलती है| इच्छा पूरा होना चाहती है, ख़त्म हो जाना चाहती है, जो असंभव है| कुछ भी पा कर जीवन की रिक्तता ख़त्म नहीं होती| वो जो हीन नहीं है, वो तुममे ही सोया हुआ है| उसे जगाओ, उसकी तरफ ध्यान दो|

मन से मुक्ति मन की चाल

वक्ता: मन को मिरतक देखि के, मति माने विश्वास साधु तहाँ लौं भय करे, जो लौं पिंजर साँस।। ​ माया के बड़े से बड़े छलावों में यह है कि ‘मैं नहीं हूँ’। सबसे

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