अपने ऊपर भरोसा क्यों नहीं है?

बात सिर्फ़ आत्मविश्वास की नहीं है । ‘हमें विश्वास ही नहीं है । हमें किसी भी व्यक्ति पर, चीज़ पर, घटना पर, किसी भी बात के होने पर यकीन ही नहीं है । हमें यह भी ठीक-ठीक यकीन नहीं है कि हमारे पाँव-तले ज़मीन है कि नहीं है ।

यह सुनने में अतिश्योक्ति लगती है, पर बात ऐसी ही है । तुम जिन भी बातों पर बड़ा गहरा यकीन करते हो, कोई आकर, कुछ भारी और तीख़े तर्क देकर, उन सब यकीनों को हिला सकता है । तुम्हारे पास ऐसा कुछ भी नहीं है, जो जड़ से उखाड़ा न जा सकता हो ।

क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है?

प्रश्न: क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है? वक्ता: नहीं। हाँलांकि, विशिष्ट परिस्थितियों के अंतर्गत ऐसा हो सकता है। तुम्हें गुरु के पास वापस आना ही

अनछुए रहो, अडिग रहो

एक बात समझ लो अच्छे तरीके से: तुममें कोई कमी नहीं है| कोई भी तुम्हें ये जताने आये कि तुममें कोई कमी है, तो सुनो ही मत| कोई तुमसे अगर बोलने आए कि बी.टेक. कर लो वरना बेवक़ूफ़ रह जाओगे, तो भगा दो उसको| कोई बोले कि तुझे ऐसी ऐसी नौकरी नहीं मिली, तो तू बेवक़ूफ़ रह गया, तो भगा दो उसको|

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