व्यर्थ चीज़ों को जीवन से कैसे हटाएँ? || आचार्य प्रशांत, आत्मबोध पर (2019)

जीवन को साफ़-साफ़ देखकर के जब तुम समझने लगते हो कि कौन-सा काम तुम्हारी सच्च्चाई से निकल रहा है, और कौन-सा काम तुम्हारी कमज़ोरी से, या तुम्हारे डर से, या तुम्हारे लालच से निकल रहा है, तो उससे एक आग पैदा होती है जो जीवन की सब अशुद्धताओं को जला देती है।  

ब्रह्म को कैसे जानें? || आचार्य प्रशांत, आत्मबोध पर (2019)

‘ब्रह्म को जानने’ से आशय है – दुनिया को जान लेना, और दुनिया को जानकर के, मिथ्या पा लेना।

जब दुनिया मिथ्या हो गयी, तो ‘ब्रह्म’ को जान लिया।