आनंद सफलता की कुंजी है

जीवन उत्सव है, आनंद है। पर वो तभी है जब उसे पूरे तरीके से जिया जाए, उसमें प्रवेश किया जाए। और उस प्रवेश का ही नाम है ध्यान। पूरे तरीके से होना। जब खेल रहे हो तो पूरे तरीके से खेलो, परिश्रम बिल्कुल नहीं लगेगा।

मन प्रशिक्षण के अनुरूप ही विषय चुनेगा

प्रश्न: मेरी कमज़ोरी यह है कि मैं एकाग्र नहीं हो पाती हूँ। तो एकाग्रता को मैं अपनी ताकत कैसे बनाऊँ? वक्ता: तो सीधे सीधे सवाल

आदर्शों को अस्वीकार करो

श्रोता: कुछ  उपलब्धियां पाने के बाद एक महान व्यक्ति के लिए आसान होता है अपने रास्ते  को बताना और सुनकर ऐसा लगता है कि कितना आसान रास्ता है। क्या हमें

सही-गलत के पार

सवाल ये है, हमने क्या जाना है? हमें सब कुछ किसी बाहरी व्यक्ति या किताब ने ही बता दिया है, या जीवन में हमारी अपनी भी कोई दृष्टि है? सही-गलत हम सब के पास है। यहाँ कोई नहीं है तुम में से जो किसी बात को सही या किसी को गलत न समझता हो, लेकिन तुम में से बहुत कम होंगे जिन्होंने सही-गलत को अपनी नज़र से पाया है।

बोध सशक्त प्रेरणा है

वक्ता: जहाँ मोटिवेशन है, वहां डीमोटिवेशन भी आएगा| मोटिवेशन शब्द ही तभी अर्थपूर्ण है जब पहले डीमोटिवेटीड हो| जो डीमोटिवेटीड है उसी को ही तो

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