आत्म- विचार से आत्म-बोध तक

वक्ता: देखो, जो मैं कह रहा हूँ अगर वो पूरी तरह समझ में ना आए तो हैरान मत होना, ये बातें पूरी तरह समझने वाली

दुःख – सुख की स्मृति

सुख का साथी जगत सब, दुख का नाही कोय । दुःख का साथी साइयां, ‘दादू’ सदगुरु होय ॥              

अध्यात्म क्या है?

प्रश्न: अध्यात्म क्या है? वक्ता: जानना आपका स्वभाव है| और अगर आप साधारण जानने से ही शुरू करें तो आप जो कुछ जानना चाहते हैं, उसके

मृत्यु में नहीं, मृत्यु की कल्पना में कष्ट है

प्रश्न: मृत्यु से भय इसलिए नहीं लगता कि शरीर छूट जाएगा, पर मृत्यु से पहले का कष्ट आक्रांत करता है| इस कष्ट से बचने का

चलना काफी है

आपने ऐसे लोग देखे होंगे जो बोलते हैं, खूब बोलते हैं, और मौन आते ही असहज हो जाते हैं, बड़े बेचैन से हो जाते हैं। अगर वो आपके साथ बैठे हैं, और बीच में एक मिनट का भी मौन आ जाए, तो इनके लिए मौन झेल पाना बड़ा मुश्किल होता है। क्योकि, शब्दों में हमारा झूट छिपा रहता है। मौन मे तो मन का सारा तथ्य उद्घाटिक होने लगता है। मौन नहीं झेल पाएंगे।

बहता पानी निर्मला

बहता पानी निर्मला, बंधा गंदा होये | साधु जन रमता भला, दाग न लागे कोये || वक्ता: बहने से क्या तात्पर्य है? रुकने से क्या तात्पर्य

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