आलस माने क्या?

आलस बड़ी चालाक चीज़ होती है | कोई भी फ़िज़ूल काम करने में तुम्हें कभी आलस नहीं आयेगा | तुमने कभी गौर किया है कि तुम्हें आलस किन कामों में, किन चीजों में आता है?

आलस ऐसा नहीं है कि अँधा है | खूब आँखें हैं उसके पास, बड़ा शातिर है | खूब चुन-चुन के आता है आलस | कभी देखा है तुम्हें आलस किन-किन चीजों में आता है?

आलसी-वालसी नहीं हो तुम | तुम बड़े परिश्रमी हो | जहाँ पर तुम्हारे स्वार्थ सिद्ध हो रहे होते हैं वहाँ तुम्हें कभी आलस नहीं आयेगा | खूब दौड़ लगा लोगे |

मन से दोस्ती कर लो

मन का हक़ है, थोड़ा सा इधर उछल लिया, उधर कूद लिया। बन्दर है, लेकिन अपना बन्दर है।

उसको यह अनुमति नहीं दी जा सकती कि सर पर चढ़कर उपद्रव करे, घर में तोड़-फोड़ करे। पर ये भी ठीक नहीं है ना कि तुमने उसको इतनी सख्ती से बाँध दिया खम्भे से कि वो बेचारा अधमरा ही हुआ जा रहा है, ख़त्म ही हो गया है।

मन बन्दर ही रहेगा, मन नहीं योगी हो जाता। हाँ, यह है कि तुम बंदर के साथ प्रेम से रहो, तो बंदर भी प्रेम की भाषा समझ जाता है। फ़िर वो भी धीरे-धीरे कुछ बातें ऐसी जान जाता है, जो वैसे नहीं समझाई जा सकतीं; प्रेम से जान जाता है।

वहीँ मिलेगा प्रेम

अनाड़ी मन जो होता है उसके लिए जमीन का प्रेम, जमीन से बंधे रहने की जंजीर बन जाता है। और जो ज्ञानी होता है उसके लिए ज़मीन का प्रेम, आसमान में उड़ने का पंख बन जाता है। अनाड़ी मन के लिए तथ्य सिर्फ एक बंद कोठरी रह जाते हैं, मुर्दा तथ्य। और जागृत मन के लिए, यही तथ्य सत्य का द्वार बन जाते हैं। जमीन तुम्हारा बंधन भी है और तुम्हारा अवसर भी। इसी से चिपके रह गए और ध्यान न दिया और समर्पित न हुए, तो इससे बड़ा बंधन नहीं है।

सँसार महा बंधन है, पर यही सँसार, मुक्ति का अवसर भी है। सब-कुछ तुम पर निर्भर करता है।

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