गुरु की उपस्थिति सबसे बड़ा अनुशासन होती है।

गुरु की उपस्थिति सबसे बड़ा अनुशासन होती है। उपस्थिति भी, अनुपस्थिति भी। जब वो गुरु सा आचरण न कर रहा हो, उस वक़्त अगर ढीले

सीख पाना मुश्किल क्यों?

गुरु की उपस्थिति सबसे बड़ा अनुशासन होती है। उपस्थिति भी, अनुपस्थिति भी। जब वो गुरु सा आचरण न कर रहा हो, उस वक़्त अगर ढीले पड़ गए, तो तुम उस क्षण से भी चूक जाओगे जब वो गुरु सा आचरण कर रहा होगा।

अब वो खेल रहा है तुम्हारे साथ रेत पर, ठीक है? और उस वक़्त तुमनें कहा कि अभी तो हम ढील ले सकते हैं इसके साथ, तो तुम चूके। अब तुम तब भी उसे ठीक से नहीं सुन पाओगे, जब वो प्रवचन देता होगा, संदेश देता होगा, शिक्षा देता होगा। छोटी-छोटी बातों में सतर्क रहना होता है। तुम ये थोड़ी ही कर सकते हो कि दोपहर में तुम गुरु के प्रति एक भाव रखो, शंका का या अनादर का, या द्वन्द का; और शाम को जब वो बोलने आए तो तुम अचानक बहुत बड़े श्रवण कुमार हो जाओ कि अब तो हम सब सुन लेंगे। तुम्हारा सुनना हो ही नहीं पाएगा क्योंकि दिन भर तुम उसके सामने नतमस्तक नहीं थे।

उसे अगर रात को सुनना है ठीक से, तो दिन भर उसके सामने तुम वैसा ही रहो जैसा उसके सामने तुम्हें प्रवचन में होना चाहिए, सतसंग में होना चाहिए। तुम ये थोड़े ही कर सकते हो कि अभी थोड़ी देर पहले तो तुम पीठ पीछे ऊटपटांग बात करो और फिर सामने आओ तो तुम्हें गुरु के वचनों का सारा लाभ मिल जाए, सारा सार पता चल जाए। नहीं, वो नहीं हो पाएगा। छोटी बातों में सतर्क रहो, बहुत तगड़ा अनुशासन रखो। समझ रहे हो?

गुरु और गुरु के निर्देश एक होते हैं, उन निर्देशों का अगर तुम कभी भी उल्लंघन कर रहे हो तो समझ लेना कि फिर…। जब सार की बात आएगी तुम्हारे सामने, जिसको तुम सार कहते हो, फिर वो भी नहीं मिलेगी तुमको।

आचार्य प्रशांत
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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

अभिनय का मतलब नकली होना नहीं है

आज तक गुस्सा कर के कोई खुश नहीं हुआ| नफ़रत कर के किसी को आनंद नहीं अनुभव हुआ| तुम खुद नहीं चाहते कि तुम्हें गुस्सा आए| तुम खुद नहीं चाहते तुम नफ़रत करो| ये सब चीज़े खुद अपने आप हट जाएँ क्योंकि तुम खुद इनको नहीं चाहते हो| पर तुम इन्हें पालते हो| क्यों? मन में वैहम गया है कि गुस्सा करने से मेरी अहमियत बढ़ती है| मन में एक वहम बैठ गया है कि नफ़रत करना ज़रूरी है अगर मुझे अपना प्यार सिद्ध करना है| तुम जानते हो हम नफ़रत अक्सर क्यों करते हैं? क्योंकि हम किसी को अपना प्यार सिद्ध कर रहे होते हैं|
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

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 आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

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   जागृति माह
 जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का  हिस्सा बन सकते हैं।

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सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

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सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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उचित-अनुचित में भेद कैसे करें?

एक जगा हुआ, एक वास्तविक रूप से बुद्धिमान व्यक्ति जो अपनी निजता में जीता है, वो कभी भेड़ नहीं हो सकता। उसे कोई शौक नहीं है कि किसी का आवागमन करने का और ना वो चाहता है कि कोई और उसका अनुगमन करे। वो कहता है ‘’हम सब पूर्ण ही पैदा हुए हैं।’’ गहरी श्रद्धा है उसके जीवन में, कहता है ‘’बोध सबको उपलब्ध हो सकता है। उस परम की रोशनी हम सबको ही मिली हुई है।’’ और यही व्यक्ति फिर मानवता का फूल होता है “दा सॉल्ट ऑफ अर्थ।” उसके रास्ते में अड़चनें आ सकती हैं, उसे पागल घोषित किया जा सकता है क्योंकी जो समाज के अनुसार ना चले, समाज को वो पागल ही लगता है। उसको ख़तरनाक कहा जा सकता है क्योंकि अन्धेरे के लिए वो खतरनाक ही है, रोशनी होकर।लेकिन वो लोग भी, जो उसे खतरनाक घोषित कर रहे होते हैं, जो उसको पागल कह रहें होते हैं, पत्थर मार रहे होते हैं, ज़हर पिला रहे होते हैं, वो भी कहीं ना कहीं उसकी पूजा कर रहे होते हैं। मन ही मन कहते हैं ‘’काश, हम भी ऐसे हो सकते। हाँ, मारना तो पड़ रहा है इसे, पर काश हमें भी इसकी थोड़ी सी सुगन्ध मिल जाती।‘’
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
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अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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प्रकृति के तीन गुण

ज्ञान वो है जो अज्ञान को काटे।
पर ज्ञान के साथ दूषण ये होता है कि वो अज्ञान को तो काट देता है, लेकिन स्वयं बच जाता है।
गुणातीत होने का अर्थ है कि अज्ञान नहीं रहा, और अज्ञान के बाद अब ज्ञान भी नहीं रहा। अब तो शान्त बोध है।
उसी शान्त, खाली बोध को साक्षित्व कहते है।

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