माहौल से प्रभावित क्यों हो जाता हूँ?

एक बच्चे के साथ ऐसा होगा और अच्छा है ऐसा हो, कि उसे बाहर से ही प्रभावित होना पड़े, क्योंकि आप एक बच्चे के विवेक पर ये नहीं छोड़ सकते कि ये जो बिजली का सर्किट है, इसमें उंगली डालनी है या नहीं। अगर वो प्रयोग करके सीखेगा, तो शायद शारीरिक रूप से बचेगा ही नहीं। एक बच्चे का प्रभावित होना स्वाभाविक है आठ साल, दस साल, बारह साल की उम्र तक, पर दिक्कत ये है कि तुम अभी तक बारह साल की उम्र के ही रह गए हो।प्रौढ़ता, व्यस्कता तुममें आ ही नहीं रही है।

न सामाजिक न पशु

जानते हो हिंदी में पशु को क्या कहा जाता है ? पशु l धातु है पाश और पाश का मतलब है बंधन l जो भी गुलाम है वही पशु है l “मनुष्य एक सामाजिक पशु है” कहने का अर्थ ये हुआ कि मनुष्य को पाश में – दासता में- अनिवार्यतः रहना ही होगा, कि दासता मनुष्य का प्रारब्ध है l

बाहरी प्रेरणा साथ नहीं देती

बाहरी आता है, एक माहौल बनाता है, तुम्हारे मन को बिलकुल आंदोलित कर देता है l उसके रहते मन आंदोलित होता है पर क्या ऐसा उत्साह सदा रह सकता है? प्रभाव जाएगा और उसके साथ तुम्हारा उत्साह भी चला जाता है l

और क्या जीवन हमने ऐसे ही नहीं बिताया है ?

रात गयी बात गयी

रात गयी, बात गयी l वो बीत गया- अब उसका सवाल क्यों पूछना ?
ये बीमारी तुम सब के साथ है, एक की ही नहीं है l तुम अतीत के साथ अभी भी चिपके हुए हो l सपना था, बीत गया, सपने में कर दिया किसी का क़त्ल, अब क्यों प्रायश्चित कर रहे हो ?

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