डर और मदद

तुम ये इच्छा करो ही मत कि तुम्हारे साथ कुछ बुरा न हो । तुम ये कहो कि, “जो बुरे से बुरा भी हो सकता हो, मुझमें ये सामर्थ्य हो कि उसमें भी कह सकूँ कि ठीक है, होता हो जो हो ।” लेकिन याद रखना, जो बुरे से बुरे में भी अप्रभावित रह जाए उसे अच्छे से अच्छे में भी अप्रभावित रहना होगा । तुम ये नहीं कह सकते कि, “ऐसा होगा तो हम बहुत खुश हो जायेंगे, लेकिन बुरा होगा तो दुःखी नहीं होंगे ।” जो अच्छे में खुश होगा, उसे बुरे में दुःखी होना ही पड़ेगा । तो अगर तुम ये चाहते हो कि तुम्हें डर न लगे, कि तुम्हें दुःख न सताए, कि तुम्हें छिनने की आशंका न रहे तो तुम पाने का लालच भी छोड़ दो ।

अवलोकन और ध्यान में अंतर

हमारे जीवन में यदि उर्जा का अभाव है, यदि हम जो कुछ भी करते हैं उसमे संशय बना रहता है, तो स्पष्ट है कि जीवन में स्पष्टता नहीं है, निजता नहीं हैI कारण – जीवन में ‘अवलोकन’ नहीं हैI अवलोकन किसी भी चीज को स्पष्ट रूप से देखना है – बिना धारणाओं के हस्तक्षेप के – यानि ध्यान की पृष्ठभूमि में देखना है, और ये उर्जा का अनंत स्रोत हैI ये बिखरी हुई, अस्पष्ट, दिशाहीन उर्जा नहीं है, बल्कि केन्द्रित है, एक नुकीली तीर की तरह, जिसे स्पष्ट पता है कि उचित कर्म क्या हैI

क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है?

प्रश्न: क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है? वक्ता: नहीं। हाँलांकि, विशिष्ट परिस्थितियों के अंतर्गत ऐसा हो सकता है। तुम्हें गुरु के पास वापस आना ही

अनछुए रहो, अडिग रहो

एक बात समझ लो अच्छे तरीके से: तुममें कोई कमी नहीं है| कोई भी तुम्हें ये जताने आये कि तुममें कोई कमी है, तो सुनो ही मत| कोई तुमसे अगर बोलने आए कि बी.टेक. कर लो वरना बेवक़ूफ़ रह जाओगे, तो भगा दो उसको| कोई बोले कि तुझे ऐसी ऐसी नौकरी नहीं मिली, तो तू बेवक़ूफ़ रह गया, तो भगा दो उसको|

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