संगीत में छुपे खतरे || आचार्य प्रशांत (2019)

मात्र विशिष्ट संगीत है जो बंधनों को काटता है।

बहुत ही ख़ास स्त्रोत से आया हुआ।

ध्यान से उठता है संगीत, तब उसमें वो विशिष्ट गुणवत्ता आती है।

इसीलिए शास्त्रीय संगीत होता दूसरे आयाम का है।

पढ़ाई के किसी विषय में रुचि न हो तो? || आचार्य प्रशांत (2019)

इंटरेस्ट या रुचि छोटी चीज़ होती है, सत्यता बड़ी चीज़ होती है।

अहंकार कहता है, “रुचि को प्रधानता दो।”

अध्यात्म कहता है, “धर्म प्रधान है।”

अध्यात्म का अर्थ ही है – रुचि की परवाह ही न करना, और उस तरफ़ चलना जिस तरफ़ धर्म है, जिधर सत्य है।

चाँद से आगे ले गया भारत को चंद्रयान || आचार्य प्रशांत, चंद्रयान-2 पर (2019)

भारत की प्रगति की राह में मैं बहुत बड़ा रोड़ा मानता हूँ, विज्ञान के प्रति जो हमारी उपेक्षा और अशिक्षा है।

अशिक्षा भर होती तो कोई बात नहीं थी, सिर्फ़ अशिक्षा भर होती तो कोई बात नहीं थी।

हम उपेक्षा भी करते हैं।

तो चन्द्रयान का जो दूरगामी लाभ है भारत को, वो ये है कि भारत जगा है विज्ञान के प्रति।

और भारत का विज्ञान के प्रति जगना बहुत ज़रूरी है, नहीं तो  – अंधविश्वास, और अंधविश्वास, और अंधविश्वास!

आई.आई.टी., आई.आई.एम. के बाद अध्यात्म की शरण में क्यों गये आचार्य प्रशांत जी?||आचार्य प्रशांत (2019)

न धोखा है, न गलती है।

गति है, यात्रा है, लय है। 

ना उसके पाने में कुछ विशेष  था, ना उसके छोड़ने में कुछ विशेष है।

आध्यात्मिक साधना में वस्त्र आदि का महत्व || आचार्य प्रशांत (2018)

वस्त्रों का अपने आप में कोई महत्त्व नहीं है।

लेकिन वस्त्र तुम्हें याद दिलाते हैं कि जो करने जा रहे हो, वो महत्त्वपूर्ण है।

कभी वो वस्त्र गेरुए होते हैं, कभी काले होते हैं, कभी श्वेत होते हैं।

और सब प्रकार के रंगों का अपना महत्त्व होता है।

सांसारिक लक्ष्यों के लिए अध्यात्म का उपयोग || आचार्य प्रशांत (2019)

शिव से शांति माँगो, सत्य माँगो, बोध माँगो – ये समझ में आता है।

क्योंकि शिव शांति स्वरूप हैं, सत्य स्वरूप हैं, बोध स्वरूप हैं।

जिन कामों का सत्य से कोई सम्बन्ध नहीं, उन कामों को अध्यात्म से क्यों जोड़ते हो?  

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