आचार्य प्रशांत: मन तो उलझा है, दिल फिर भी सुलझा है

छटपटाहट हमेशा वजह कहीं और खोज ले जाती है। मूलतः तुम ही वजह हो। ये छटपटाहट तुम्हें कभी नहीं जानने देगी।

इसके लिए तो रुकना पड़ेगा।

और रुकने का मतलब, फिर से कह रहा हूँ, रुकने का मतलब ये नहीं है कि तुम कहना शुरू कर दो कि जो है बड़ा अच्छा है, मैंने स्वीकार किया। रुकने का मतलब ये है कि बीमार हूँ और बीमारी के तथ्य से भाग नहीं रहा।

सच्चा आदमी वो है, जो दोनों तलों पर, एक साथ जीए।
वो कहे कि मन तो उलझा-उलझा है, दिल लेकिन तब भी सुलझा है।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

जिन्हें अभी अनुभवों की तलाश हो, वो आध्यात्मिकता से दूर रहें!

काम तो आपके वही आएगा, जो किसी के भी काम आ सकता है, वो है सत्य। काम तो राम ही आएगा। आपकी सारी बातचीत के

आचार्य प्रशांत: पुरानी आदतें कैसे सुधारें?

आध्यात्मिकता का, किसी भी रुचिकर अनुभव से कुछ लेना देना नहीं!

जिन्हें अभी अनुभवों की तलाश हो, वो आध्यात्मिकता से दूर रहें!

काम तो आपके वही आएगा, जो किसी के भी काम आ सकता है, वो है सत्य। काम तो राम ही आएगा। आपकी सारी बातचीत के बाद, आपके सारे प्रत्यनों और प्रार्थनाओं के बाद, अंततः काम तो राम ही आना है। आदतों पर चर्चा काम नहीं आएगी। समस्त साधना निष्फल ही जाएगी। कुछ नहीं है जो शान्ति देगा आपको, यदि वह राम के अतिरिक्त किसी और को केंद्र में रख कर चल रहा है।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

ये हत्यारे, ये लुटेरे, ये बलात्कारी कहाँ से आते हैं?

जिस प्रकार के अपराध जिस समाज में सबसे ज्यादा होते हैं वो समाज वही है जिस ने उन बातों पर सबसे ज्यादा बंदिश लगा रखी

व्यर्थ है मन को बाँधना

जिस प्रकार के अपराध जिस समाज में सबसे ज्यादा होते हैं वो समाज वही है जिस ने उन बातों पर सबसे ज्यादा बंदिश लगा रखी होती है। जितना दबाओगे तुम विचार को उतनी ऊर्जा दोगे। तुम सोचते हो की दबाने से विचार चला गया। मन हँसता है मन कहता है, “पगले, तुम जानते भी नहीं हो कि वो दबाने से जाता नहीं है वो स्प्रिंग की तरह है, स्प्रिंग को दबाओ तो स्प्रिंग छोटी हो जाती है पर साथ ही वो कुछ इकठ्ठा कर लेती हो ? क्या ? जितनी उर्जा तुमने इस्तेमाल की उसको दबाने के लिए, स्प्रिंग उसको पी गयी है तुमको लग रहा है स्प्रिंग तो गयी, छोटी सी हो गयी है, कहाँ बची? तुमको पता भी नहीं है अब होगा क्या? तुम्हारी ही इस उर्जा का इस्तेमाल कर के अब वो स्प्रिंग उछलेगी और फिर तुम ये कहोगे ये ? मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ? ये तुम्हीं ने किया है।

उसको दबाने की कोशश कर कर के तुमनें उसको ताकतवर बना दिया है। ये हत्यारे, ये बड़े बड़े लुटेरे, ये बलात्कारी, तुम्हें लगता है कहाँ से आते हैं ? ये सब दमन के परिणाम हैं, तुम इतना दमन करते हो कि अंततः विस्फ़ोट हो जाता है। तुम अपने आप को ही इतना दबाते हो कि अंत में बिलकुल ज्वालामुखी फटता है और फिर तुम कहते हो, “ये क्या हो गया?” उदाहरण के लिए जो लोग कभी गुस्सा व्यक्त नहीं करते, वो जिस दिन गुस्से में आते हैं, उस दिन दूर-दूर रह लेना। जो आदमी बिलकुल पी जाता हो वो जिस दिन फटता है, जो आदमी बात-बात पर चिढ़ जाता है, बात-बात पर गुस्सा व्यक्त कर देता है वो ठीक है। वो कोई बड़ा नुकसान नहीं पँहुचा सकता लेकिन जो आदमी कभी गुस्सा व्यक्त न करता हो उसे भगवान बचाए। वो जिस दिन फटता है उस दिन दो-चार लाशें गिरती हैं। क्योकि वो जो उसने व्यक्त नहीं होने दिया वो उसके भीतर अब इकठ्ठा हो रहा है, इकठ्ठा हो रहा है। फिर फटेगा, जबरदस्त रूप से फटेगा।

आचार्य प्रशांत
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf                            

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