पढ़ने बैठो तो मन भागता है || आचार्य प्रशांत (2020)

विद्या-अविद्या दोनों साथ होने चाहिए।

इस डर से कि अविद्या तुममें देहभाव और प्रबल कर देगी, अविद्या को छोड़ा नहीं जा सकता।

दुनिया के बारे में भी जानना ज़रूरी है।

एकदम कुछ नहीं जानोगे, भोंदू रहोगे, कुछ पता ही नहीं है दुनिया का, तो फिर अध्यात्म भी तुम्हें समझ नहीं आएगा।

नव वर्ष का आरम्भ, आचार्य प्रशांत जी के संग || प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन (2019)

हर साल की तरह इस बार भी ,
नव वर्ष का स्वागत अद्वैत परिवार ने
बोध की दिशा में कदम बढ़ाते हुए रखा,
और इस महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए
दूर-दूर से आये आचार्य जी के प्रेमी व शिष्यों ने भाग लिया,
जो भलीभांति जानते थे
कि नव वर्ष का आरम्भ उसके साथ होना चाहिए
जो प्राथमिक है, और एक आनंदमय व बोधपूर्ण जीवन के लिए
अति -आवश्यक है।

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