हम व्यर्थ फँसे हुए हैं

मेरा जीवन है, मेरी अपनी भी कोई स्वेच्छा है, अपनी दिशा, अपनी गति मैं खुद निर्धारित करूँगी। तनाव सिर्फ उसको होता है जो रस्सी की

जिन्हें अभी अनुभवों की तलाश हो, वो आध्यात्मिकता से दूर रहें!

काम तो आपके वही आएगा, जो किसी के भी काम आ सकता है, वो है सत्य। काम तो राम ही आएगा। आपकी सारी बातचीत के

लड़की बाद में है और इंसान पहले है।

मुझे दुसरों की बात को बेमतलब वजन तभी देना होता है, जब मुझे साफ-साफ नहीं पता होता कि क्या ‘उचित’ है और क्या ‘अनुचित।’ देखो!

जहाँ तुम थम जाओ, वहीं वो है

ख़ुदा थोड़े ही चाहिए तुम्हें, चैन चाहिए। ख़ुदा चैन नहीं देता, जहाँ चैन मिल जाये वहाँ ख़ुदा है। जहाँ चैन मिल जाये वहाँ ख़ुदा जानें।

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