उक्तियाँ, बोध सत्र से, ७ दिसंबर ‘१४

उक्तियाँ, बोध सत्र से, ७ दिसंबर ‘१४ ————————————– १. हरिजन तो हारा भला, जीतन दे संसार ।  हारा तो हरि से मिले, जीता जम के

उक्तियाँ, बोध सत्र से, ३० नवंबर '१४

उक्तियाँ, बोध सत्र से, ३० नवंबर ‘१४ —————————— —————————— —————————— —————————— 1. जे तू राखै साईयाँ, मार सके ना कोय ।        बाल न

उक्तियाँ, बोध सत्र से, दिनांक २६ नवंबर '१४

उक्तियाँ, बोध सत्र से, दिनांक २६ नवंबर ‘१४ ——————————————— 1. आपदः संपदः काले दैवादेवेति निश्चयी। तृप्तः स्वस्थेन्द्रियो नित्यं न वान्छति न शोचति॥        

उक्तियाँ बोध सत्र से, २३ नवंबर '१४

उक्तियाँ बोध सत्र से, रविवार, २३ नवंबर ‘१४ विषय: कबीर, अष्टावक्र शुद्धमद्वयमात्मानं भावयन्ति कुबुद्धयः| न तु जानन्ति संमोहात्यावत्जीवमनिर्वृताः|| -अष्टावक्र गीता(१८.४३) प्रश्न १: सुबुद्धि और कुबुद्धि

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