उक्तियाँ, बोध सत्र से, २५–३१ जनवरी ‘१५

उक्तियाँ, बोध सत्र से, २५–३१ जनवरी ‘१५ ————————————————————- १. तुमने जिधर को भी कदम बढ़ाया है, उसी की ओर बढ़ाया है- कभी जान के, और

उक्तियाँ, बोध सत्र से, १८–२४ जनवरी ‘१५

उक्तियाँ, बोध सत्र से, १८–२४ जनवरी ‘१५ —————————————————— १. तुम सोचते हो कि अपनी चतुराई में तुम आपदाओं से बचने के उपाय कर रहे हो।

उक्तियाँ, बोध सत्र से, ११–१७ जनवरी ‘१५

उक्तियाँ, बोध सत्र से, ११ – १७ जनवरी ‘१५ ———————————————————– १. यह मत पूछो कि गुस्सा आने पर क्या करें। पूछो कि जीवन कैसा हो जिसमें

उक्तियाँ, बोध सत्र से, ४ – १० जनवरी '१५

उक्तियाँ, बोध सत्र से, ४ जनवरी ‘१५ – १० जनवरी ‘१५ ————————————————————————– १. भूल का कोई सुधार नहीं होता। कोई आकस्मिक गलती नहीं हुई है – आप

उक्तियाँ, बोध सत्र से, २८ दिसंबर '१४ – ३ जनवरी '१५

उक्तियाँ, बोध सत्र से, २८ दिसंबर ‘१४ – ३ जनवरी ‘१५ ——————————————————————————————— १. दुनिया पैसे की अंधी दौड़ है। उसकी वजह ज़रूरतें नहीं हैं, बल्कि

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