स्त्री-पुरुष के मध्य आकर्षण का कारण || आचार्य प्रशांत (2019)

ये दो अलग-अलग केंद्र होते हैं काम करने के।

तुम प्रकृति के चलाए भी चल सकते हो, और बोध के चलाए भी चल सकते हो।

प्रकृति के चलाए चलोगे तो  महापाप होगा, उसकी सज़ा मिलती ही मिलती है।

बोध के चलाए चलोगे तो मुक्ति पाओगे, जो जीवन का परम लक्ष्य है।

स्त्री शरीर का आकर्षण हावी क्यों? || आचार्य प्रशांत (2018)

वासना को तो विषय चाहिए।

और वासना को जब विषय चाहिए ही, तो क्यों न उसे ऐसा विषय दे दें जो वासना को ही शांत कर दे।

तुम्हें कुछ तो चाहिए ही पकड़ने के लिए, तो क्यों न तुम्हें कुछ ऐसा दे दें कि जिसको तुमने पकड़ा नहीं कि वो तुम्हें पकड़ ले।

जो इतना बड़ा हो, कि तुम्हारी पकड़ से बाहर का हो।

जिसको पकड़ने के लिए तुम्हें उसमें घुल जाना पड़े।

इसीलिए देने वालों ने तुमको ‘राम’ का नाम दिया, ‘राम’ का काम दिया।

वो नाम भी बहुत बड़ा है, वो काम भी बहुत बड़ा है।

चाँद से आगे ले गया भारत को चंद्रयान || आचार्य प्रशांत, चंद्रयान-2 पर (2019)

भारत की प्रगति की राह में मैं बहुत बड़ा रोड़ा मानता हूँ, विज्ञान के प्रति जो हमारी उपेक्षा और अशिक्षा है।

अशिक्षा भर होती तो कोई बात नहीं थी, सिर्फ़ अशिक्षा भर होती तो कोई बात नहीं थी।

हम उपेक्षा भी करते हैं।

तो चन्द्रयान का जो दूरगामी लाभ है भारत को, वो ये है कि भारत जगा है विज्ञान के प्रति।

और भारत का विज्ञान के प्रति जगना बहुत ज़रूरी है, नहीं तो  – अंधविश्वास, और अंधविश्वास, और अंधविश्वास!

आइन रैंड की द फाउन्टेनहेड पर (The Fountainhead by Ayn Rand) || आचार्य प्रशांत (2019)

जवान लोगों को होवार्ड रोअर्क(फाउंटेनहेड के नायक) से मिलना चाहिए!

बहुत कुछ है उससे सीखने को।

बचपना, नादानियाँ, निर्भरताएँ, दुर्बलता और आश्रयता की भावना- इन सबसे एक झटके में मुक्त करा दे, ऐसा क़िरदार है वो।

क्या सेक्स का कोई विकल्प है जो मन शांत रख सके? || आचार्य प्रशांत (2018)

कुछ बातों का समाधान करने के लिये भी उन बातों से उलझा नहीं जाता।

बस उन बातों से आगे बढ़ जाते हैं।

आगे बढ़ जाओ, तो ये बातें पीछे छूट जाती हैं।

और इनका समाधान करने लग गये, तो इन बातों के सामने अटके रह जाओगे।

नफ़रत हटाने का सीधा उपाय || आचार्य प्रशांत (2018)

कभी किसी से बड़ी नफ़रत उठे, तो एक सूत्र बताये देता हूँ।

अपनी नफ़रत को और अपने अहंकार को, थोड़ी देर किनारे रखकर उससे एक घण्टे बात कर लेना।

फिर नफ़रत कर नहीं पाओगे और ज़्यादा।

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