गृहिणी के लिए बाधा क्या? || आचार्य प्रशांत (2018)

गृहिणी की प्रगति कहाँ निहित है? गृहिणी का आध्यात्मिक विकास कैसे हो? गृहिणी के लिए अशांति के क्या कारक हैं? गृहिणी के लिए बाधाएं क्या और गृहिणी के लिए मुक्ति किस प्रकार संभव है?

फ्रेडी मर्करी के जीवन से प्रेरणा (On Bohemian Rhapsody by Freddie Mercury) || आचार्य प्रशांत (2019)

अभी एक फिल्म आई थी “बोहेमियन रहैप्सोडी”, कुछ लोगों ने देखी होगी, उसका नायक जो है जैसा कि जानते ही हो फ्रेडी मर्करी, उसे एड्स है, कैंसर नहीं, एड्स! कैंसर में तो एक बीमारी होती है, एड्स में तो दस कैंसर होते है, कैंसर तो एक बीमारी है, एड्स में न जाने कितनी बीमारियाँ लग जाती हैं, कैंसर भी लग सकता है, और उसके जीवन के आखिरी कुछ महीने, और जो लोग इस व्यक्ति की जीवन कथा से परिचित होंगे उन्हें पता होगा कि मरते-मरते भी संगीत रचित कर रहा था, और यह कोई आध्यात्मिक आदमी नहीं, यह तो एक प्रचलित रॉकस्टार है।

यह प्रेम की बात है।

होशपूर्ण जीवन के लिए नए साल के 10 नए संकल्प || आचार्य प्रशांत (2018)

नये साल में नये कपड़े, नये पकवान, नई जगहों का भ्रमण, और हर साल की तरह – नये संकल्प, नये लक्ष्य। प्रत्येक साल हमारे संकल्प और लक्ष्य कुछ ही दिनों में कोरी बात बनकर रह जाते हैं। नया चाहिए तो सबको, पर शायद मिलता किसी को नहीं। क्या कारण है? क्यों जीवन को एक नया रंग-ढंग देने के हमारे सभी संकल्प समय के साथ फ़ीके पड़ जाते हैं? क्यों कुछ नया पाने की चाह में हम पुराने को ही दोहरा जाते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारे संकल्पों की गुणवत्ता में ही कमी है।

क्यों नहीं पूरे होते हमारे संकल्प?

यदि ईश्वर सबकी सभी माँगें पूरी कर दें तो क्या होगा? || (आचार्य प्रशांत, 2018)

प्रश्न: यदि ईश्वर सबकी सभी माँगें पूरी कर दें तो क्या होगा?

आचार्य प्रशांत: तो ईश्वर का अस्तित्व मिट जाएगा।

ईश्वर और जीव(व्यक्ति) एक ही द्वैत के दो सिरे हैं।

ईश्वर जीव की कामना है, ऐसी कामना जिससे वो सोचता है कि अन्य कामनाओं की पूर्ति हो जाएगी। जीव कहता है कि जीव ईश्वर की रचना है। पर जीव का ईश्वर भी जीव की ही कल्पना है।

आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग: जब हाथ फैलाओगे तो स्वतंत्र कैसे रह पाओगे?

आज़ादी एक कठिन चीज़ है, हर किसी को नहीं मिलती। आज़ादी की कीमत है ‘ज़िम्मेदारी’।

ज़िम्मेदारी आप लेना नहीं चाहते तो फिर कहते हो ठीक है, मुझपे बड़ा दबाव है।

हमें अपने युवा होने का कोई बोध है कि नहीं है? १८-२० साल के हो गए हो और हाथ फैला कर खड़े हो, ये जवानी की निशानी है? फिर कहते हो कि समझौता क्यूँ करना पड़ता है? तुमने ‘चुना’ है, समझौता करना।

तुमने चुना है।

~ आचार्य प्रशांत

————————————————-

निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
~~~~~
२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
~~~~~
३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
~~~~~
४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
~~~~~
५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
~~~~~
६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
~~~~~~
७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
~~~~~
८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
~~~~~~
९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
~~~~~~
१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

~~~~~~
इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग: तुम मानव हो या मशीन?

देखो, आदमी के अस्तिव के दो छोर हैं- एक छोर पर हम पूरी तरीके से मशीन हैं। दिल एक बड़ी कुशल मशीन है, आँख भी एक बड़ी कुशल मशीन है। आदमी के दिमाग जितनी कुशल मशीन आज तक कोई वैज्ञानिक बना नहीं पाया। ये एक छोर है, हमारे होने का। जहाँ पर कोई ‘जीवन’ नहीं है! गति दिखाई तो पड़ती है, पर वो गति मृत स्वरुप है। पूर्व-निर्धारित (प्री-प्रोग्राम्ड) गति है। दूसरे छोर पर हम पूरे तरीके से स्वतन्त्र हैं। वहाँ कोई पूर्व-निर्धारित तरीके से नहीं चल सकता।

ये तुम्हें तय करना है कि तुम किस छोर पर जीना चाहते हो। ये पक्का है कि मशीन वाले छोर पर रहोगे तो बेचैन रहोगे।

~ आचार्य प्रशांत

————————————————-

निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
~~~~~
२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
~~~~~
३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
~~~~~
४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
~~~~~
५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
~~~~~
६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
~~~~~~
७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
~~~~~
८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
~~~~~~
९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
~~~~~~
१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

~~~~~~
इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

1 2 3 4 5 6 19