जीसस की अनोखी कहानी (Jesus: A True Rebel) || आचार्य प्रशांत (2016)

जीसस एक जवान आदमी है। एक साधारण से घर में पैदा हुआ है, पेशे से गरेड़िया है; और वास्तव में जवान है। और एक जवान आदमी की सारी आग मौजूद है उसमें।

उतश्रृंखल, उन्मुक्त घूमता है, छोटी-सी उसकी एक टोली है। इधर-उधर, सड़कों पर घूम-घूम के बजा रहा है लोगों की! जो बात जैसी दिखती है जस-का-तस वैसा बोल देता है। जो भौतिक पार्थिव बाप है उसका, उसको लेकर के बहुत मज़ा नहीं है उसको, इसलिए कह देता है हम तो उसके (परमात्मा) के बेटे हैं।

मन को अखाड़ा न बनने दें ||आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग (2012)

हमारा मन अखाड़ा बना रहता है — कभी ये विचार, कभी वो विचार, तुम चलते-फिरते सोचते रहते हो।

ध्यान में बस एक नई चीज़ होती है कि जो ‘विचार’ आते हैं तुम उनके प्रति सजग हो जाते हो और जैसे ही सजग होते हो कुछ ऐसा देख लेते हो जो शांत कर देता है। जैसे कोई भूखा हो और पेट भर गया तो शांत हो जाए वैसे ही जब आप ध्यान में विचारों को देख लेते हो तो शांत हो जाते हो। एक विचलित मन को भूख तो होती ही है, शांति की भूख होती है इसमें कोई शक नहीं, लेकिन तुम्हें ऐसा माहौल नहीं मिल पाता जिसमें तुम ध्यान में हो सको, शांत हो सको।

दुःख को ध्यानपूर्वक देखने का क्या अर्थ है? || आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग (2013)

दुःख का असर तुम पर होता है, लेकिन तुम्हारा एक कोना ऐसा है जहाँ दुःख नहीं पहुँच सकता। उस कोने को याद रखो बस। कुछ भी तुम्हारे साथ ऐसा कभी-भी नहीं होता है, जो तुम्हारे मन को पूरी तरह ही घेर ले। एक छोटा-सा बिंदु होता है तुम्हारा जो बच जाता है, उस बिंदु को याद रखो। तो जब दुःख आए, तो तुमसे यह नहीं कहा जा रहा है कि दुःख महसूस मत करो, लेकिन पूरे तरीके से दुःख ही मत बन जाओ। उस दुःख को आने दो।

संकोच माने क्या? || आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग (2013)

संकोच का उल्टा अर्थ मत निकाल लेना। कोई संकोच नहीं करता इसका अर्थ यह नहीं है कि वो पूरा मनमौजी हो गया है, निरंकुश हो गया है। ‘संकोच नहीं है’ इसकी एक ही जायज़ वजह हो सकती है — स्पष्टता।

स्पष्टता में अगर शांत भी बैठे हो तो बढ़िया। हम संकोच न होने का आमतौर पर यह अर्थ निकालते हैं कि यह बिंदास है, कुछ भी जाकर बोल आता है। यह अधूरी बात है, आधी बात है। जो संकोच नहीं करता वो चुप रहने में भी संकोच नहीं करता — यह पूरी बात हुई। वो बोलने में भी संकोच नहीं करता और चुप रहने में भी। तो कभी तुम चुप रह जाओ तो अपनेआप को अपराधी मत समझ लेना। मौन बड़ी बात है और कई बार शब्दों से ज़्यादा कीमती होता है मौन।

गृहिणी के लिए बाधा क्या? || आचार्य प्रशांत (2018)

गृहिणी की प्रगति कहाँ निहित है? गृहिणी का आध्यात्मिक विकास कैसे हो? गृहिणी के लिए अशांति के क्या कारक हैं? गृहिणी के लिए बाधाएं क्या और गृहिणी के लिए मुक्ति किस प्रकार संभव है?

फ्रेडी मर्करी के जीवन से प्रेरणा (On Bohemian Rhapsody by Freddie Mercury) || आचार्य प्रशांत (2019)

अभी एक फिल्म आई थी “बोहेमियन रहैप्सोडी”, कुछ लोगों ने देखी होगी, उसका नायक जो है जैसा कि जानते ही हो फ्रेडी मर्करी, उसे एड्स है, कैंसर नहीं, एड्स! कैंसर में तो एक बीमारी होती है, एड्स में तो दस कैंसर होते है, कैंसर तो एक बीमारी है, एड्स में न जाने कितनी बीमारियाँ लग जाती हैं, कैंसर भी लग सकता है, और उसके जीवन के आखिरी कुछ महीने, और जो लोग इस व्यक्ति की जीवन कथा से परिचित होंगे उन्हें पता होगा कि मरते-मरते भी संगीत रचित कर रहा था, और यह कोई आध्यात्मिक आदमी नहीं, यह तो एक प्रचलित रॉकस्टार है।

यह प्रेम की बात है।

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