क्या करेगी कविता

बेकार ही है एक कविता से बहुत अपेक्षा करना। पहले तो बामुश्किल अस्तित्व में आएगी आनंद पीड़ा के दुष्प्राप्य क्षणों से प्रजात इस पल से

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