आत्मबोध के अभाव में, आत्मा के अभाव में, प्रेम संभव नहीं है।

आपको बड़ा भ्रम है अगर आप सोचते है कि आप बिना स्वयं को जाने, सत्य को जाने, बिना पूरे तरीक़े से जाग्रत हुए प्रेमी हो

जो बाहरी को बाहरी जाने उसे कहते हैं भीतरी।

अब ध्यान से समझना। जो बाहरी को बाहरी जाने उसे कहते हैं भीतरी। बाहरी जो कुछ है वो वस्तु है, पदार्थ है, विचार है, कल्पना

जिसे सत्य का पता है उसके लिए सारे तथ्य सार्थक हो जाते हैं

तुम जिन शब्दों में दिन रात खेलते-कूदते रहते हो, तुम जिन शब्दों में लगातार जी रहे हो, जो शब्द तुम्हारे मानस-पटल पर दिन-रात उभरते रहते

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