गुरु की उपस्थिति सबसे बड़ा अनुशासन होती है।

गुरु की उपस्थिति सबसे बड़ा अनुशासन होती है। उपस्थिति भी, अनुपस्थिति भी। जब वो गुरु सा आचरण न कर रहा हो, उस वक़्त अगर ढीले

शान्ति वो आराम है जो निर्बाध्य रहता है, अक्षुण्ण रहता है, अविचल रहता है

एक मोटा आदमी कुर्सी पर बैठ के आराम कर रहा है। और एक स्वस्थ, सुडौल, मज़बूत काठी का छरहरा आदमी दूसरी कुर्सी पर बैठा हुआ

विशुद्ध चेतना का नाम ही परमात्मा है।

आस्तिक सभी हैं, बस अपनी अपनी तरह के आस्तिक हैं। असली आस्तिक कोई नहीं है। सब? अपनी अपनी तरह के आस्तिक हैं। निर्वैयक्तिक आस्तिक कोई

मुक्ति पानी नहीं है मुक्ति भीतर बैठी है, वो लगातार आवाज़ देती है।

मुक्ति पानी नहीं है मुक्ति भीतर बैठी है, वो लगातार आवाज़ देती है। आनन्द पाना नहीं है, मिला ही हुआ है वो भी लगातार आवाज़

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