मन पर चलना आज़ादी नहीं || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2015)

कभी भी इस तर्क को महत्त्व मत देना कि – “भई, अपनी-अपनी मर्ज़ी होती है।”

अपनी मर्ज़ी, ‘अपनी’ होती ही नहीं।

लाखों में कोई एक होता है, जिसकी अपनी मर्ज़ी होती है।

जो आदमी जितनी मुस्कुराहट पहने घूम रहा हो, जान लेना कि भीतर उसके घोर व्यथा है

तुम्हारे जीवन में दुःख आएगा, तुम रो पड़ोगे। तुम्हारे जीवन से दुःख जाएगा, तो भी तुम रो पड़ोगे। सामान्य भाषा में इस दूसरे रोने को हम

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