लड़कियों से बात करने में झिझक || आचार्य प्रशांत (2018)

अगर ऐसे लोगों की संगति है तुम्हारी जो तुम्हें बार-बार यही याद दिलाते हैं कि तुम्हारी उम्र क्या है, तुम्हारा क़द क्या है, तुम्हारा रूप-रंग क्या है, तो ऐसों की संगति से बचो।

कोई भी पहचान तुम्हारी तो होती नहीं ।  

दुनिया तुम्हारे ऊपर पहचान थोपती है।  

तो जो लोग, जो माहौल, जो संगति तुम्हारे ऊपर कोई भी पहचान थोपती हो, उस संगति से बचो ।

लड़ना हो तो शांत रहकर लड़ना सीखो || आचार्य प्रशांत (2018)

ऐसा लड़ाका चाहिए।

पुर्ज़ा -पुर्ज़ा  कट जाए उसका, अंग-अंग कटके गिर जाए लड़ाई में, फ़िर भी वो लड़ाई से हटे नहीं।

और इस सूरमा की पहचान जानते हो क्या है?

ये अपनी सारी अशांति पीछे छोड़कर जाता है।

ये सिर पहले कटाता है, फ़िर युद्ध में जाता है।

अब अशांत कौन होगा?

ये सिर अशांति का गढ़ था, वो इसको ही पीछे छोड़ आया ।

तो लड़ाई चाहिए, निश्चित रूप से चाहिए।

धर्मयुद्ध चाहिए, लेकिन धर्मयुद्ध वही कर सकता है जो बहुत शांत हो।

केसरी फ़िल्म, कैसे और बेहतर हो सकती थी?|| आचार्य प्रशांत (2019)

वीरता मूलतः आध्यात्मिक ही होती है।

वीरता कोई अहंकार की बात नहीं होती कि – लड़ जाएँगे, भिड़ जाएँगे, मर जाएँगे।

न।

अहंकार पर आधारित जो वीरता होती है वो बड़ी उथली होती है, थोड़ी दूर चलती है फ़िर गिर जाती है।

ऐसी वीरता जो शहादत को चुनने ले, वो तो आध्यात्मिक ही होगी।  

व्यर्थ चीज़ों को जीवन से कैसे हटाएँ? || आचार्य प्रशांत, आत्मबोध पर (2019)

जीवन को साफ़-साफ़ देखकर के जब तुम समझने लगते हो कि कौन-सा काम तुम्हारी सच्च्चाई से निकल रहा है, और कौन-सा काम तुम्हारी कमज़ोरी से, या तुम्हारे डर से, या तुम्हारे लालच से निकल रहा है, तो उससे एक आग पैदा होती है, जो जीवन की सब अशुद्धताओं को जला देती है।  

नारी के लिए आकर्षण हो तो || आचार्य प्रशांत (2019)

कुछ तो हो जाओ शरीर से आगे के, तो फ़िर तुम्हें दुनिया भी फिर शरीर से आगे की दिखाई दे।

नहीं तो दुनिया का कामकाज चलता रहेगा, तुम्हारी नज़र बस माँस पर रहेगी। 

नहीं है न?

दुनिया को माँस की तरह देखना छोड़ना हो, तो स्वयं को माँस की तरह देखना छोड़ो।

तुम स्वयं जितने ऊँचे उठते जाओगे, दुनिया को देखने का तुम्हारा नज़रिया भी बदलता जाएगा।

क्या पुनर्जन्म होता है? || आचार्य प्रशांत (2018)

तुम जो कुछ हो , उसका कोई पुनर्जन्म नहीं होता।

तुम्हारा कोई पुनर्जन्म नहीं होता।

जहाँ तक आत्मा के पुनर्जन्म की बात है, वो पुनर्जन्म नहीं है।

वो खेल है, वो लीला है।  

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