शिक्षा के दो आयाम

वक्ता- निशा का सवाल है कि जीवन में शिक्षा की आवश्यकता है ही क्यों? है किसलिए शिक्षा? ज़िन्दगी चमकाने के लिए, पैसे कमाने के लिए,

शरीर यन्त्र है, तुम नहीं

क्या तुम्हारे साथ ऐसा नहीं होता कि सिर दर्द हो रहा है पर तुम कहो कि सिर को दर्द होने दो, हम नहीं रुकेंगे? शरीर को मशीन की भाँति लगे रहने दो। तुम मशीन मत बन जाना।

अवसर अभी है

श्रोता: सर, कहा जाता है कि जो लोग सफल होते हैं वो अपने अवसर ख़ुद बनाते हैं! हम अपने अवसर ख़ुद कैसे बनायें? वक्ता: बनाना

गया न मन का फेर

प्रश्न: सर, जो दुखी है क्या वो भी इगोइस्ट है? वक्ता: पीड़ित होने में बड़े मज़े हैं। अगर तुम पीड़ित हो तो तुम्हें हक मिल

ज़िन्दा हो कि नहीं?

छात्र: सर, मरने के बाद हम कहाँ जाते हैं ? वक्ता: मरने से पहले हम कहाँ हैं ? {हँसी} सवाल ये नहीं है कि मरने

अंतरात्मा तुम्हारी नहीं

छात्र: सर, हम अपनी अंतरात्मा की आवाज़ क्यों नहीं सुन पाते? जैसे पहली बार शराब पीने से पहले पता होता है कि गलत है पर रुक

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