नफ़रत हटाने का सीधा उपाय || आचार्य प्रशांत (2018)

कभी किसी से बड़ी नफ़रत उठे, तो एक सूत्र बताये देता हूँ।

अपनी नफ़रत को और अपने अहंकार को, थोड़ी देर किनारे रखकर उससे एक घण्टे बात कर लेना।

फिर नफ़रत कर नहीं पाओगे और ज़्यादा।

जन्म-मृत्यु क्या हैं? || आचार्य प्रशांत (2019)

ये जो चीज़ों को लम्बा खींचने की उम्मीद है, समझो तो सही कि ये उम्मीद आ कहाँ से रही है।

ये उम्मीद आ रही है, आत्मा की स्मृति से।

‘अहम’ को वहाँ जाना है, अमरता वहीं पर है।

लेकिन उसकी जगह वो जुड़ जाता है – कभी पानी के साथ , कभी कपड़ों के साथ, कभी बादल के साथ, और कभी शरीर के साथ।  

और जिसी के साथ जुड़ता है, उसके साथ वो उम्मीद बाँधता है – नित्यता की, अमरता की।

सच्चा सुमिरन कैसे करें ?|| आचार्य प्रशांत, नितनेम साहिब पर 2019

दुनिया में ही कुछ स्थान ऐसे होते हैं, जो आपको स्थानों से मुक्त कर देते हैं।

आप उन स्थानों पर मौजूद तो रहो।

उन्हीं स्थानों पर कुछ समय ऐसे रहते हैं, जो आपको समयातीत से मिला देते हैं।

आप उस समय गायब कहाँ हो?

दुनिया से बाहर जाने की विधि क्या है?

दुनिया।

बस ज़रा विवेक के साथ दुनिया में कदम रखना।

कैवल्य क्या है? || आचार्य प्रशांत (2018)

‘कैवल्य’ का अर्थ है – जहाँ भी हो, जैसे भी हो, जिससे भी घिरे हो, तुम आत्मनिष्ठ रहो।

जो एक सत्य है, जो केवल सत्य है, उसमें स्थापित रहो।

तुम्हारी परम वरीयता, ‘परम’ ही रहे।

परमात्मा ही परम वरीयता रहे तुम्हारी।

संशय, प्रमाद और आलस क्यों हावी होते हैं? || आचार्य प्रशांत, पतंजलि योगसूत्र पर (2019)

अहम को हमेशा जुड़ने के लिये कोई चाहिये।

तो अहम को शान्ति देने का, लय देने का यही तरीका है कि – उसे सही वस्तु के साथ जोड़ दो।

और कोई तरीका नहीं है।

जुड़ेगा तो वो है ही, निश्चित रूप से जुड़ेगा।

अकेला वो नहीं रह सकता।

वो प्रतिपल किसी-न-किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार के साथ जुड़ा ही हुआ है।

जब उसे जुड़ना ही है, तो उसे सही संगति दो न।

कुछ बच्चे इतना डरते क्यों हैं? || आचार्य प्रशांत (2018)

नुकसान व्यर्थ चीज़ नहीं होती।

नुकसान के लाभ हैं। 

नुकसान न हुआ होता, तो और बड़ा नुकसान हो जाता, इसीलिये नुकसान भली बात है।

हर नुकसान छोटा है, क्योंकि उसके आगे और बड़ा नुकसान  है।

जब भी नुकसान हो, और धन्यवाद दो।

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