ये आशिक़ी ले डूबी तुम्हें || आचार्य प्रशांत (2019)

जो अन्दर की बात है, उसको जानना सीखो।

ऊपर-ऊपर जो है, वो शत-प्रतिशत झूठ है !

ऊपर-ऊपर जो दिखाई पड़ता है, उसके पीछे क्या चल रहा है, ये समझने की ताक़त पैदा करो।

इक ज़रा सी बात याद रखो || आचार्य प्रशांत (2019)

बहुत सारा जो याद रखे हुए है, समझ लीजिए वो सब कुछ भूले हुए है।

जो जितना ज़्यादा याद रख रहा है, वो उतना ज़्यादा भूला हुआ है।

क्या है ढ़ाई आखर प्रेम का? || आचार्य प्रशांत, कबीर साहब पर (2019)

तो ज्ञान के विक्रेता भी ख़ूब होते हैं।

वो ज्ञान बेच-बेचकर के दुनिया की चीज़ें कमाते हैं।

दुनिया की पार की मंज़िल पर पहुँचने का उनका कोई इरादा नहीं।

ज्ञान बहुतों को मिलता है, काम किसी-किसी के आता है।

एकाग्रता क्यों नहीं बनती? || आचार्य प्रशांत (2017)

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मन को कैसे एकाग्र करें? || आचार्य प्रशांत (2017)

मुक्त अस्तित्व का न होना ही कष्ट है।

‘कमी है’ के भाव को जितना पोषण दोगे, उतना ज़्यादा मन मलिन होता जाएगा, धूमिल होता जाएगा।

मन को संयमित कैसे करें? || आचार्य प्रशांत (2019)

संसार में ही ख़ास तरह के विषय होते हैं, जिनके पास जाओ अगर, तो वो संसार से आगे, संसार से पलटकर, तुमको आत्मा की ओर ले जाते हैं।

आत्मा पर संयम करने का अर्थ हुआ, मन के सन्दर्भ में – संसार के उस विषय पर संयम करना, जो तुम्हें आत्मा तक ले जा सके।

वो विषय आपके व्यक्तित्व पर निर्भर करते हुए अलग-अलग होता है।

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