आचार्य प्रशांत: रचनाकार | विध्वंसक | कुछ भी नहीं

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प्रशांत त्रिपाठी, जो अब आचार्य प्रशांत के नाम से जाने जाते हैं, का जन्म 1978 में उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में हुआ। वे  तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनके पिता भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत थे व माँ गृहिणी थीं। अधिकांश बचपन उत्तर प्रदेश में ही बीता।

बाल्यकाल में उनके माता-पिता व शिक्षकों ने उन्हें एक विलक्षण बालक पाया जो कभी शरारती तो कभी सहसा चिंतनशील हो जाता था। दोस्त भी उन्हें एक ऊर्जावान साथी के रूप में याद करते हैं जिसके व्यवहार से अक्सर निश्चित नहीं हो पाता था कि मज़ाक कर रहा है या गंभीर है। वो एक मेधावी छात्र थे, उन्होंने लगातार अपनी कक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उनकी माँ याद करती हैं कि किस तरह उन्हें अपने बच्चे के शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए कई बार मदर क्वीन के रूप में सम्मानित किया गया । शिक्षक कहते थे कि पहले उन्होंने कभी ऐसा छात्र नहीं देखा था जो विज्ञान और गणित में उतना ही मेधावी हो, जितना कि मानविकी में, और अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों ही एक सा पारंगत हो। राज्य के तत्कालीन राज्यपाल ने बोर्ड परीक्षा में एक नया मानदंड स्थापित करने, और साथ ही एन.टी.एस.ई. परीक्षा उत्तीर्ण  करने के उपलक्ष्य में सार्वजनिक समारोह में उनका सम्मान भी किया।

पाँच वर्ष की आयु से ही वे एक अत्युत्सुक छात्र थे, किताबें पढ़ना उन्हें प्रिय था। उनके पिता के पुस्तकालय में हर देश, काल एवं संस्कृति से उत्तम साहित्य मौजूद था, जिसमें उपनिषदों जैसे आध्यात्मिक ग्रंथ भी थे। कई-कई घंटे वे घर के शांत कोनों में, ऐसी किताबों में डूबे हुए पाए जाते थे, जिन्हें केवल बड़ी उम्र के परिपक्व लोग ही समझ पाते थे। कभी-कभी वे भोजन, और यहाँ तक कि सोने से समय चुराकर, पढ़ने में खोए रहते थे। ग्यारह साल का होते-होते, उन्होंने पिता के संग्रह में उपलब्ध सब कुछ पढ़ लिया था, और अधिक की माँग करने लगे थे।

उनमें आध्यात्मिक गहराई के आरम्भिक लक्षण तब दिखाई दिए जब उन्होंने ग्यारह की उम्र में कविताएँ लिखना शुरू किया। शब्दों के रहस्यमयी रंगों में उन्होंने ऐसे काव्यात्मक सवाल पूछे जो अक्सर बड़े भी समझ भी नहीं पाते थे।

कई वर्षों तक लखनऊ शहर में रहने के बाद वे अपने पिता की स्थानान्तरणीय नौकरी के कारण पंद्रह साल की उम्र में दिल्ली के पास गाज़ियाबाद शहर में आ गए। किशोरावस्था और शहर के परिवर्तन ने उस प्रक्रिया को और तेज़ कर दिया जो पहले ही गहरी जड़ें ले रही थी। वे रातों में देर तक जागने लगे; और अक्सर रात को चुपचाप आकाश को निहारते रहते थे। जैसे-जैसे समय बीता, उनकी कविताओं की गहराई बढ़ी। उनकी कई कविताएँ रात्रिकाल और चंद्रमा को ही समर्पित है। ध्यान रहस्यवाद की ओर अधिक बहने लगा।

उन्होंने अकादमिक रूप से अच्छा प्रदर्शन करना जारी रखा और प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली में प्रवेश प्राप्त किया। आइ.आइ.टी. के दिनों में उन्होंने न केवल दुनिया को समझा, साथ-ही-साथ छात्र-राजनीति में सक्रिय रहे, और राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद व नाट्य प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। वे आइ.आइ.टी के परिसर में एक जीवंत व्यक्ति, एक भरोसेमंद छात्र नेता और मंच पर एक उत्साही कलाकार की तरह जाने जाते थे। वे लगातार ऐसी वाद-विवाद और आशुभाषण प्रतियोगिताओं को जीतते गए, जिनमें देशभर से प्रतिभागी हिस्सा लेते थे। उन्होंने बोध-युक्त नाटकों में निर्देशन और अभिनय के लिए पुरस्कार भी जीते। एक नाटक, ‘झपुर्झा’  में उनके एक प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार’ मिला, जिसमें उन्होंने न एक शब्द कहा और न ही एक कदम हिले।

लंबे समय से उन्हें खटक रहा था कि जिस तरह से ज़्यादातर लोग दुनिया को देखते और समझते हैं, जिस तरह से हमारा मन संस्कारित है, और जैसे लोगों के बीच सम्बन्ध हैं, और जैसे सांसारिक संस्थान हमें जीवन निर्देश देते हैं, इसमें कुछ मूलरूप से गलत है। उन्होंने पाया कि यह दोषपूर्ण दृष्टिकोण ही मानवीय पीड़ा का मूल कारण है। वे मनुष्य की अज्ञानता, संस्कारित हीन-भावना, आंतरिक-गरीबी, उपभोगतावाद, मनुष्य की जानवरों और पर्यावरण के प्रति हिंसा, संकीर्ण विचारधारा और स्वार्थकेन्द्रित शोषण से आहत थे। उनका व्यक्तित्व मनुष्य के अँधेरे को चुनौती देने के लिए उतावला था, और एक युवा के रूप में उन्होंने अनुमान लगाया कि ‘भारतीय सिविल सेवा’ या प्रबंधन मार्ग इसके लिए उपयुक्त होगा।

1999 में आइ.आइ.टी से उत्तीर्ण होने के बाद उन्होंने सन 2000 में भारतीय सिविल सेवा और भारतीय प्रबंध संस्थान- अहमदाबाद में एक साथ प्रवेश प्राप्त किया। उनकी रैंक के आधार पर उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा नहीं आवंटित हुई – और साथ ही उन्होंने देखा कि क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए प्रशासनिक सेवा एक अच्छा विकल्प भी नहीं रह गया है। तो उन्होंने आइ.आइ.ऍम. जाने का विकल्प चुना।

आइ.आइ.ऍम. में दो साल शैक्षणिक रूप से समृद्ध थे। लेकिन वो ऐसे छात्र नहीं थे जो खुद को नौकरी और अंकों और नौकरी के लिए सीमित कर दें, जैसा कि प्रतिष्ठित संस्थानों में अक्सर होता है। वे नियमित रूप से गांधी आश्रम के पास एक झुग्गी में संचालित एक एन.जी.ओ. में छोटे बच्चों को पढ़ाते थे और बच्चों पर खर्च करने के लिए वरिष्ठ विद्यार्थियों को गणित भी पढ़ाते थे। इसके अलावा मनुष्य  के अँधेरे के प्रति अपने गुस्से को रंगमंच के माध्यम से व्यक्त किया। उन्होंने ‘खामोश अदलात जारी है’, ‘राइनोसोरस’, ‘पगला घोड़ा’ और ’16 जनवरी की रात’ जैसे नाटकों में अभिनय के अलावा उन्हें निर्देशित भी किया। एक बिंदु पर वह दो समानांतर नाटकों का निर्देशन कर रहे थे, जिसे देख अध्यापक व उनके सहपाठी सभी आश्चर्यचकित थे। नाटकों का प्रदर्शन आई. आई. एम  सभागार में शहर और बाहर के भी दर्शकों के लिए किया गया था। परिसर के पदार्थवादी एवं लाभ-केंद्रित वातावरण में वे खुद को बेमेल पाते थे। इन अस्तित्ववादी और विद्रोही नाटकों ने उनकी पीड़ा को एक सृजनात्मक दिशा देनें में मदद की और उन्हें आगे आने वाले बड़े मंचों के लिए तैयार किया।

आइ.आइ.ऍम से परास्नातक होने के बाद तीन-चार वर्ष तक अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय एवं भारतीय कंपनियों में काम किया। पर न कहीं मन लगा न कहीं टिके। वे इस अवधि को ‘भटकाव’ और ‘खोज’ के रूप में वर्णित करते हैं। कॉर्पोरेट जगत में अर्थवत्ता की तलाश करते हुए शांति के लिए वे समय निकालकर शहर और काम से दूर चले जाते थे। धीरे-धीरे उन्हें स्पष्ट होता जा रहा था कि वो क्या करना चाहते थे। कुछ विराट उनके माध्यम से व्यक्त होने के लिए तड़प रहा था, और वो किसी पारंपरिक मार्ग से नहीं हो सकता था। इस अवधि में उनका स्वाध्याय व संकल्प और गहन हुआ।

अपने ज्ञान और आध्यात्मिक साहित्य को आधार बना कर पर उन्होंने स्नातकोत्तर  के छात्रों व अनुभवी पेशेवरों के लिए लीडरशिप पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार किया। पाठ्यक्रम कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाया गया और कभी-कभी वे उम्र में अपने से बड़े छात्रों को भी पढ़ाते थे। इस पाठ्यक्रम को सराहनीय सफलता प्राप्त हुई और उनको आगे का रास्ता और स्पष्ट होने लगा।

अट्ठाइस की आयु में उन्होंने कॉर्पोरेट जीवन को अलविदा कहा और आध्यात्मिकता के माध्यम से एक नई मानवता का निर्माण करने हेतु उन्होंने ‘अद्वैत लाइफ़-एजुकेशन’ की स्थापना की – उद्देश्य साफ  था: मानव चेतना में एक गहरा परिवर्तन लाना। शुरुआत कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों से की गई जिन्हें आत्मबोध पर आधारित एक पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाने लगा। प्राचीन आध्यात्मिक ग्रंथों के ज्ञान को सरल और आकर्षक गतिविधियों के रूप में छात्रों तक ले जाया गया।

‘अद्वैत’ मिशन का काम महान और प्रशंसनीय होने के बावजूद, उसके सामने बड़ी चुनौतियाँ भी थीं। सामाजिक और शैक्षणिक प्रणाली ने छात्रों को केवल परीक्षा पास करके नौकरियाँ पाने के लिए यांत्रिक तौर पर प्रशिक्षित कर दिया था। अद्वैत मिशन द्वारा ‘आत्मबोध आधारित शिक्षा’, ‘जीवन की बुनियादी शिक्षा’, छात्रों के लिए इतनी अलग और नई थी कि छात्र अक्सर उदासीन हो जाते,  और खुद को वर्तमान प्रणाली के विरोध में पाते। बहुधा कॉलेजों की प्रबंधन समिति और छात्रों के माता-पिता इस साहसपूर्ण प्रयास को समझने में असफल हो जाते। हालांकि इन सभी कठिनाइयों के बीच ‘अद्वैत’ ने अच्छा प्रदर्शन करना जारी रखा। इस प्रकार मिशन का विस्तार जारी रहा, जिसने लाखों छात्रों के जीवन को छुआ और आज भी रूपांतरित कर रहा है।

तीस की आयु में, आचार्य प्रशांत ने सार्वजनिक रूप से सभाओं में बोलना शुरू किया। उनके सत्र खुली चर्चा के रूप में आयोजित किए जाते थे। जल्द ही सभी को यह स्पष्ट होने लगा कि ये सत्र श्रोताओं को गहन रूप से ध्यान में ले जाते हैं। इनसे मन को एक अद्भुत शांति और स्पष्टता मिलती है। कुछ समय बाद ये सत्र रिकॉर्ड होकर इंटरनेट पर प्रकाशित किए जाने लगे।

उसी समय उन्होंने अद्वैत-बोध शिविरों का आयोजन शुरू किया। वे अपने साथ अनेक साधकों को लगभग एक सप्ताह की अवधि के लिए हिमालय पर ले जाने लगे। ये शिविर हज़ारों साधकों के जीवन परिवर्तन का माध्यम बने; और कुछ ही समय में इन शिविरों की आवृत्ति में वृद्धि हुई। बोध और शांति प्रदान करते सैकड़ों अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन आज तक किया जा चुका है। साथ ही साथ हज़ारों वीडिओ, लेख व कई पुस्तकों का प्रकाशन भी हो चुका है।

आचार्य प्रशांत का आध्यात्मिक साहित्य मानव इतिहास के उच्चतम शब्दों के समतुल्य है। वे दुनिया के सभी हिस्सों से आने वाले अनेक साधकों से संवाद करने में, अद्वैत बोध शिविरों और अन्य मिशन सम्बंधित कार्यों में व्यस्त रहते हैं। उनके शब्द एक तरफ़ मन पर चोट करते हैं और दूसरी तरफ़ प्रेम और करुणा से सहारा देते हैं। एक स्पष्टता है जो उनकी उपस्थिति मात्र से चारों ओर फैलती है। उनकी शैली स्पष्ट, रहस्यमयी और करुणामयी है। अहंकार और जड़ धारणाएँ उनके निर्दोष व सरल सवालों के सामने छिप नहीं पाती। वे अपने दर्शकों के साथ खेलते है – उन्हें ध्यानपूर्ण मौन की गहराइयों तक ले जाते हैं, हँसते हैं, मज़ाक करते हैं, चुनौती देते है, समझाते हैं।

एक और उनके व्यक्तित्व से किसी करीबी मित्र की झलक मिलती है, तो दूसरी ओर यह भी स्पष्ट होता है कि उनके शब्द बहुत दूरस्थ किसी स्रोत से आ रहे हैं।

इंटरनेट पर उनके द्वारा अपलोड किए गए हज़ारों वीडियो और लेख कीमती आध्यात्मिक संसाधन हैं, जो सभी जिज्ञासुओं के लिए उपलब्ध हैं। व्यक्तिगत रूप से भी वे सत्य के ईमानदार साधकों से मिलने के लिए सदा तत्पर हैं।

आज अद्वैत आंदोलन लाखों व्यक्तियों के जीवन को रूपांतरित कर चुका है। हर देश, धर्म, लिंग, संस्कृति एवं आयु के लोग आचार्य प्रशांत को सुन रहे हैं और प्रेमपूर्वक, शांत एवं ईमानदार जीवन जीने की प्रेरणा पा रहे हैं।

आचार्य प्रशांत का जीवन मानवमात्र के उद्धार के साथ प्रत्येक चैतन्य प्राणी के संरक्षण हेतु समर्पित है। वे अपने सेवाओं के माध्यम से विलुप्त होते जीव-जंतुओं एवं जानवरों के प्रति हो रही हिंसा का पुरजोर विरोध करते हैं; और वैश्विक पटल पर एक युवा आध्यात्मिक  मिशनरी के रूप में प्रख्यात हैं।


आचार्य प्रशांत जी के सत्संग निःशुल्क रूप से उपलब्ध हैं

हिंदी सत्संग: आधिकारिक हिंदी यूट्यूब चैनल

अंग्रेजी सत्संग: आधिकारिक अंग्रेजी यूट्यूब चैनल


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अथवा, संस्था से 9643750710 पर संपर्क करें, या requests@advait.org.in पर ईमेल करें।


34 comments

  1. नमस्ते सर आप कैसे है | मेरा नाम मनुज है मै आप के लेख काफी समय से पढ रहा हु| सच मे आप के लेख बहुत अच्छे है मैने बहुत लेख पढे विडीयो देखी पर आपकी बाते सबसे अलग है और बडी आसानी से समझ आ जाती है| आप बांतो को बिल्कुल गहराई से समझाते है ओर समस्याओ कि जड तक जा कर उसका समाधान निकालते है सर मैं आपसे एक बार जरुर मिलना चाँहूगा पर सर एक समस्या है वो यह कि जो 1000 लेखो कि पूर्ण सुची मे जो लेख है उन्से से जो अलग लेख है | उन लेखो को खोलने पर वे लेख आते ही नही है कुछ और ही लेख आते है सर मेरी तरफ से आपके लिये बहुत-बहुत धन्यबाद

    1. प्रिय मनुज जी,

      यह वेबसाइट प्रशान्त अद्वैत फाउन्डेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित है एवं यह उत्तर भी उन्हीं से आ रहा है।

      बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहे हैं|

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से, लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है, आचार्य जी के सम्मुख होकर, उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
      इस अद्भुत अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें:
      सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर:
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर, आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। निःसंदेह यह शिविर खुद को जानने का सुनहरा अवसर है।

      ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित 31 बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
      इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें:
      श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
      सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें:
      श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।

      सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें:
      सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे ।

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

  2. Jab man udas hota hai aur sansarikta ko samajhna mushkil lagta hai to aapki batein man ko kisi unmukt sansar mein le jati hain..jahna shanti aur aanand ki prapti hoti hain…

    1. प्रिय विजया जी,

      यह वेबसाइट प्रशान्त अद्वैत फाउन्डेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित है एवं यह उत्तर भी उन्हीं से आ रहा है।

      बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रही हैं|

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      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
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      ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित 31 बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
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      4. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।

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      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगी।

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

  3. sar maine aapke blogs videos ke alava AIT se cam in campus bhi kiya really sar aap great ho real life jina to aap hi bta sakte h advait life education mere liye very very important h ……. thanks sar jo aapne hme apne bare me janna sikhaya….

    1. प्रिय मुरारी जी,

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      ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित 31 बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
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      4. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।

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      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

  4. प्रणाम सर , मैं आपका लेख निम्न विचार और उच्च विचार क्या पढ़ रहा था उसमे आपने कहा है कि हमारे विचार या कल्पना अनुभव से ही आती है आपने उदाहरण दिया है कि हम शाकाहारी है तो माँस के स्वाद कि कल्पना नही कर सकते लेकिन मैं एक बड़े आलीशान बंगले मे रेह रहा हूँ इसकी कल्पना कर सकता हूँ जबकि मैं past मे इसका अनुभव नही किया हूँ हाँ ये किसी और का अनुभव है तो क्या हम दूसरो के अनुभव से कल्पना कार सकते hai? अगर हाँ तो भोजन के स्वाद कि क्यू नही कर पाए आर अगर नहीँ तो ये कल्पना कैसे कि ?

    1. प्रिय शिवंकर जी,

      यह वेबसाइट प्रशान्त अद्वैत फाउन्डेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित है एवं यह उत्तर भी उन्हीं से आ रहा है।

      बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहे हैं। अपने मन में उठ रहे सवालों के जवाब जानने के लिए कृप्या निम्नलिखित सूचना पढ़ें।

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से, लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है, आचार्य जी के सम्मुख होकर, उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर, आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। निःसंदेह यह शिविर खुद को जानने का सुनहरा अवसर है।

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      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
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      श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।

      सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें:
      सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे ।

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

  5. “”प्रेम तुम्हारी दुनिया बर्बाद कर देगा””
    sir aapne is session me ye nahi bataya ki prem me milna hota hai ya nahi..
    kya prem ke dictionary me milna hota hai??

    1. प्रिय अभिषेक जी,

      यह वेबसाइट प्रशान्त अद्वैत फाउन्डेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित है एवं यह उत्तर भी उन्हीं से आ रहा है।

      बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहे हैं और जिज्ञासा पूर्ण प्रश्न भी पूछ रहे हैं।

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से, लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है, आचार्य जी के सम्मुख होकर, उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
      इस अद्भुत अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें:
      सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर:
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर, आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। निःसंदेह यह शिविर खुद को जानने का सुनहरा अवसर है।

      ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित 31 बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
      इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें:
      श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
      सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें:
      श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।

      सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें:
      सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे ।

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

    2. प्रिय अभिषेक जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं एवं अपने अनेकों सवालों के जवाब पा रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।

      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

  6. Aacharyaji, I regularly receive your mails, the contents of it are very inspiring , particularly ” man chanchal hai edhar udhar bhag raha hai” , ees par niyantran karna hee yog sadhana hai ,joki vishesh dhyan kendrit karne say hee sambhav hai.
    AABHAR for enlighting others, Sasamman—R.K.Sharma, Kanpur.

    1. प्रिय रजनी जी,

      यह वेबसाइट प्रशान्त अद्वैत फाउन्डेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित है एवं यह उत्तर भी उन्हीं से आ रहा है।

      बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रही हैं|

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से, लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है, आचार्य जी के सम्मुख होकर, उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
      इस अद्भुत अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें:
      सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर:
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर, आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हिंसा। निःसंदेह यह शिविर खुद को जानने का सुनहरा अवसर है।

      ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित 31 बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
      इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें:
      श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
      सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें:
      श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।

      सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें:
      सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगी।

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

    2. प्रिय शर्मा जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन!

      यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।

      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे और अपने सवालों के जवाब ढूंढ पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

    1. Dear Brij,

      Following are the ways to connect with Acharya prashant:

      1. Advait Learning Camps:

      Advait Learning Camps, led by Acharya Prashant, are rare and blissful experiences, giving one the unique opportunity to come close to the forgotten saints and their scriptures, and live amid nature.

      To participate in the camp, write an e-mail to requests@prashantadvait.com
      For more details or queries, you may call: Sh. Anshu Sharma: +91-8376055661
      2. Courses in Realization:

      A Course in Realization, a classroom–based learning program led by Acharya Prashant, is a humanitarian initiative towards disseminating clarity and intelligence in the world.

      Relevant sections from scriptures like Srimad Bhagawad Gita, Upanishads, Brahm Sutras, Ashtavakra Gita, etc. are studied in these courses to unpack the ancient mysteries contained in them.

      Sessions are conducted by Acharya Prashant himself at Advait BodhSthal, Noida.

      To join in, send your application to requests@prashantadvait.com
      or contact:
      Sh. Anshu Sharma: +91-8376055661
      Sh. Apaar: +91-9818591240

      3. Shabda-Yoga Sessions:

      Clarity sessions with Acharya-Ji are like the runways from where one takes-off to the camps. These sessions are famously known as Clarity Sessions and have been attracting genuine seekers of Truth since last one decade.
      They happen twice a week in Delhi-NCR. On all Sundays at 11:00 am and on all Wednesdays at 06:30 pm.

      For those who cannot attend Shabda-Yoga sessions physically, the foundation does online streaming of these sessions via Skype or Webinar. Known as Blessings from Beyond (BFB), this facility helps seekers from across the globe listen to Acharya-Ji while being where they are.

      To receive the blessing, send your application to requests@prashantadvait.com
      or contact:
      Smt. Anoushka Jain: +91-9818585917

      4. Meet the Master:

      Meet the Master aka MTM is an opportunity to meet Acharya Prashant personally, either in person or online via Skype.

      To meet the master, send your application to requests@prashantadvait.com
      Or contact: Smt. Anoushka Jain: +91-9818585917

    2. Dear Brij,

      We are glad to share that now seekers from all over the world can get connected with the Master through various initiatives by the volunteers of PrashantAdvait Foundation.

      1. Advait Learning Camps:

      Advait Learning Camps, led by Acharya Prashant, are rare and blissful experiences, giving one the unique opportunity to come close to the forgotten saints and their scriptures, and live amid nature.

      To participate in the camp, write an e-mail to requests@prashantadvait.com
      For more details or queries, you may call: Sh. Anshu Sharma: +91-8376055661

      2. Courses in Realization:

      A Course in Realization, a classroom–based learning program led by Acharya Prashant, is a humanitarian initiative towards disseminating clarity and intelligence in the world.

      Relevant sections from scriptures like Srimad Bhagawad Gita, Upanishads, Brahm Sutras, Ashtavakra Gita, etc. are studied in these courses to unpack the ancient mysteries contained in them.

      Sessions are conducted by Acharya Prashant himself at Advait BodhSthal, Noida.

      To join in, send your application to requests@prashantadvait.com
      or contact: Sh. Apaar: +91-9818591240

      3. Shabda-Yoga Sessions:

      Clarity sessions with Acharya-Ji are like the runways from where one takes-off to the camps. These sessions are famously known as Clarity Sessions and have been attracting genuine seekers of Truth since last one decade.
      They happen twice a week in Delhi-NCR. On all Sundays at 11:00 am and on all Wednesdays at 06:30 pm.

      For those who cannot attend Shabda-Yoga sessions physically, the foundation does online streaming of these sessions via Skype or Webinar. Known as Blessings from Beyond (BFB), this facility helps seekers from across the globe listen to Acharya-Ji while being where they are.

      To receive the blessing, send your application to requests@prashantadvait.com
      or contact: Smt. Anoushka Jain: +91-9818585917

      4. Meet the Master:

      Meet the Master aka MTM is an opportunity to meet Acharya Prashant personally, either in person or online via Skype.

      To meet the Master, send your application to requests@prashantadvait.com
      Or contact: Smt. Anoushka Jain: +91-9818585917

    3. प्रिय बृज जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।

      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

    4. प्रिय बृज जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।

      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

  7. सर मैं ओशो यानी आचार्य रजनीश के बारे में कुछ प्रश्न करना चाहता हूं

    1. प्रिय मित्र,

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  8. आचार्य जी प्रणाम ।
    मेरा नाम प्रेम है, और मेरी आयु 28 वर्ष है । मेरे मन मे सन्यास ग्रहण करने की प्रबल इच्छा है, संसार से विरक्ति हो गई है, और परमात्मा में आसक्ति ।
    लेकिन प्रभु जी ये सब अचानक नहीं हुआ, जब मैं 12 वर्ष का हुआ तभी से मेरा मन आध्यात्मिकता में विचरने को आतुर होता था, किन्तु तथाकथित साहिबों ने (अभिभावकों) मेरी टांग खींच के मुझे “मेरे सच्चे साहिब” से मिलाने के बजाय मेरा मन सांसारिकता की ओर मोड़ दिया ।
    किन्तु ये टीस हर समय रहती है, आपके व्याख्यान सुनके हृदय में असीम शांति का अनुभव होता है, ऐसा प्रतीत होता है जैसे मेरे लक्ष्य के प्राथमिक द्वार आप ही हो ।
    आपसे किस प्रकार जुडें?

    1. यह मित्र,

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      नमस्ते!

  9. सर , मैं शादीशुदा होकर एक बेटी का पिता हूँ , लेकिन एक कंवारी लड़की के प्रेम में गहराई से हूं , सर मेरा अस्तित्व खतरे में हैं ।

    महोदय जी कृपा कर मार्गदर्शन कीजिये

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