उक्तियाँ, जून ‘१९

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1.

पूरा कभी मिला नहीं, आधा रास न आया।

पूरी मिले न आधी भावे, ताका नाम है माया।।

2.

अहंकार बहुत बड़ा नहीं देख पाता।

वो हमेशा छोटी चीज़ देखेगा: छोटे फायदे, छोटे नुकसान।

छोटी दृष्टि से बड़े निर्णय लिए जाते हैं, और सारे निर्णय फिर औंधे मुँह गिरते हैं।

3.

शरीर की माँग थोड़ी सी है,

और आत्मा की तो कोई माँग है ही नहीं…

फिर क्यों पगलाए घूम रहे हो?

4.

मैं मज़ेदार है। तीन-तीन पहचानें हैं उसकी।

मैं प्रकाशस्वरूप आत्मा भी है, मैं अंधेरा अहम भी है, और मैं आत्मा और अहम में चुनाव करने का विकल्प भी है।

पर उपयोगी बात ये है कि तुम अपने आप को चुनने वाला मैं ही मानो।

और सही चुनो।

5.

अध्यात्म में सही प्रश्न ये नहीं होता कि ‘मैंने पाया क्या?’

असली प्रश्न ये होना चाहिए कि ‘मैं बदला कितना?’

यदि साधना सच्ची है , तो साधक का परिणामों को लेकर आग्रह मिटता जाता है।

~ आचार्य प्रशांत @Hindi_AP 


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