उक्तियाँ, मार्च’१९ – अप्रैल’१९

१.

हम ही हमारे बंधन हैं।

इसलिए बंधन काटने की साधना अति कठिन लगती है।

जब हम बंधनों से एकाकार हो गए हों तो बंधनों का कटना ऐसा लगता हो जैसे हम ही कट रहे हों।

२.

बिना जाने मान लेना अंधविश्वास है।

बिना जाने ठुकरा देना भी बराबर का अंधविश्वास है।

३.

बोध बल है, अज्ञान दुर्बलता।

घटनाएँ हमें दुख नहीं देतीं।

घटनाओं के सामने हमारी दुर्बलता हमें दुख देती है।

मन की उलझी हुई हालत का नाम है दुख।

दुख आवश्यक नहीं है।

दुख एक चुनाव है।

तुम चुनते हो दुख को।

दुख कोई अनिवार्यता नहीं है।

तुमने अज्ञान में चाहा है, इसलिये दुखी हो तुम।

४.

अध्यात्म है नशा उतरने का तरीका।

नशा उतरा है तो बस उनका

जो आध्यात्मिक हो गए।

बाकी सब नशे में हैं।

५.

ध्येय से प्रेम नहीं तो ध्यान कैसे लगेगा?

६.

बातें रट लीं।

ज़िन्दगी में उनकी कोई उपयोगिता नहीं।

जीवन पहले से भी बदतर।

पहले सिर्फ बुद्धू थे,अब बुद्धिमान बुद्धू हो।

पहले गधे थे,अब लदे हुए गधे हो।

पहले पिटते थे तो हाय-हाय करते थे,

अब पिटते हो तो हाय राम करते हो।

लेकिन पिट तो अभी भी रहे हो!

पिटना कब बंद होगा ये बताओ।

७.

जिन्हें नशा उतारना हो

वो बोतल का ब्रांड बदलने में ना लगे रहें

८.

किसी अज्ञात आवेग से

धड़धड़ धड़कती छाती हो

मुक्ति अमर प्यास हो

हर कर्म प्रेमगीत

और शब्द प्रेमपाती हो।

जो प्रत्येक काम की

आँख में काजल

करके ही सो पाएँ

सिर्फ़ वो प्रियवर

रसमना सहचर

मेरे साथ आएँ।

साथ हम आएँगे

प्रविष्ट होंगे कर्म में

और स्वयं तक

९.

तुम्हें कैसे पता क्या अच्छा क्या बुरा?

तुम्हें किसने सिखाया क्या तुम्हारे कर्तव्य हैं? तुम्हें कैसे पता कैसे जीना कैसे मरना?

पैसे का, परिवार का, प्रेम का अर्थ?

जीवन ही क्या है तुम्हें किसने बताया?

दूसरों ने।

वे सिखा रहे हैं:देखो! हमारे अनुसार चलना और न चलो तो खुद को पापी मानना।

१०.

सुख की उम्मीद का

दूसरा नाम है दुःख

११.

इंसान एक धार्मिक जानवर है

इंसान को धर्म चाहिए।

रोटी नहीं मिलेगी, तो भूख से मरेगा,

धर्म नहीं मिला तो विक्षिप्ता से मरेगा।

देख लो तुम्हें कौन सी मौत बदतर लगती है !

रोटी भर से काम नहीं चलेगा।

~ आचार्य प्रशांत @Hindi_AP