उक्तियाँ, मई ‘१९

आचार्य प्रशांत जी से निजी रूप से मिलने व जुड़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

१ .

ऐसा नहीं है कि तुम आत्मा की बात कर रहे हो तो तुम आध्यात्मिक हो ।
या
तुम आलू की बात कर रहे हो तो भौतिक हो।
आत्मा की बात भी भौतिक दृष्टि से की जा सकती है और आलू की बात भी आध्यात्मिक दृष्टि से की जा सकती है।
दृष्टि महत्वपूर्ण है।

 

२.

प्रश्न: मृत्यु के बाद की यात्रा बताएँ।
आचार्य जी: किसकी?
प्र: मृतक की।
आचार्य जी: वो तो मर गया, अब यात्रा किसकी?
प्र: अब क्या होगा?
आचार्य जी: किसके साथ?
प्र: आत्मा के साथ।
आचार्य जी: आत्मा के साथ कभी कुछ नहीं होता।
आत्मा अद्वैत है, कौन करेगा उसके साथ कुछ? दूसरा कोई है ही नहीं।

३.

कुछ गलत हो गया है,
उसको ठीक करो, रोओ नहीं।
जवान आदमी हो, भाई!

४.

दया और सहानुभूति बड़े बंधन हैं ⁣और झूठ हैं। ⁣
दया झूठ है और बंधन है; ⁣जबकि करुणा मुक्ति से आती है और ⁣मुक्त करती है।
⁣ ⁣किसी की सहायता ⁣ करुणा में ही की जती है। ⁣ ⁣
करुणा और सहानुभूति ⁣एक बात नहीं हैं; ⁣ दया और सहानुभूति ⁣एक बात हैं।

५.

जो आत्मबल का प्रेमी नहीं वो परमात्मा का प्रेमी नहीं।
जो बार-बार अपनी कमज़ोरी का रोना रोए वो शैतान का भक्त ही हुआ।

~ आचार्य प्रशांत @Hindi_AP  


आचार्य जी से और निकटता के इच्छुक हैं? प्रतिदिन उनके जीवन और कार्य की सजीव झलकें और खबरें पाने के लिए : पैट्रन बनें  !

इस लेख और अभियान को और लोगों तक पहुँचाने में भागीदार बनें :

  • पेटीऍम (Paytm) द्वारा: +91-9999102998
  • पेपाल (PayPal) द्वारा:

अनुदान राशि

($5 के गुणक में)

$5.00


आचार्य प्रशांत से निजी साक्षात्कार हेतु आवेदन करें

अथवा, संस्था से 9643750710 पर संपर्क करें, या requests@advait.org.in पर ईमेल करें।