फ्रेडी मर्करी के जीवन से प्रेरणा (On Bohemian Rhapsody by Freddie Mercury) || आचार्य प्रशांत (2019)

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आचार्य प्रशांत जी: अभी एक फिल्म आई थी “बोहेमियन रहैप्सोडी”, कुछ लोगों ने देखी होगी, उसका नायक जो है जैसा कि जानते ही हो फ्रेडी मर्करी, उसे एड्स है, कैंसर नहीं, एड्स! कैंसर में तो एक बीमारी होती है, एड्स में तो दस कैंसर होते है, कैंसर तो एक बीमारी है, एड्स में न जाने कितनी बीमारियाँ लग जाती हैं, कैंसर भी लग सकता है, और उसके जीवन के आखिरी कुछ महीने, और जो लोग इस व्यक्ति की जीवन कथा से परिचित होंगे उन्हें पता होगा कि मरते-मरते भी संगीत रचित कर रहा था, और यह कोई आध्यात्मिक आदमी नहीं, यह तो एक प्रचलित रॉकस्टार है।

यह प्रेम की बात है।

उसके सामने कैंसर, एड्स, सब भूल जाते हैं, और फ्रेडी जैसे-जैसे मृत्यु के करीब आ रहा था, जैसे-जैसे उसका जिस्म और इकहरा होता जा रहा था, दुबलाता जा रहा था, वैसे-वैसे वो कहता था, ‘और-और म्यूजिक, और बनाओ, मुझे और गाने दो, बस, रिकॉर्ड कर लो फिर जब मैं चला जाऊँगा, फिर काम पूरा करके तुम उसका टेप बनाते रहना, पब्लिक बाद में कर लेना!’

और मैं कह रहा हूँ कि साधारण गायक भी प्रेम को इतना जानता है, और उसको प्रेम परमात्मा से नहीं हो गया है, उसको प्रेम संगीत से ही हुआ है, साधारण रॉक से प्रेम भी भय से मुक्ति दे जाता है, एक साधारण गायक का, साधारण संगीत से प्रेम उसे दुःख से कम-से-कम क्षणिक मुक्ति दे देता था, तो तुम सोचो कि अगर तुमको ‘उसी’ से प्यार हो जाए, तो तुम्हे दुःख याद रह जाएगा क्या?

फिर तुममें देह भाव जरा भी बचेगा क्या?

और यह 1991 की बात है, उस समय पर एड्स के उपचार के लिए बहुत दवाईयाँ उपलब्ध नहीं थी, बीमारी नई सामने आई थी, अनुसन्धान हो रहा था, तो कष्ट बहुत था इस व्यक्ति को, पाँव गल रहा था, अंदर के सारे अवयव बेकार हो रहे थे, और यह गाये जा रहा था, नाच भी रहा था!

देह भाव कहाँ गया?

और यह ऐसे व्यक्ति की हम बात कर रहे हैं जो देह भाव पर ही जीवित रहा और आश्रित रहा, रॉकस्टार कितना देहाभिमानी होता है जानते हो न?

रॉकस्टार से ज़्यादा देह पर आश्रित कोई होता नहीं!

तो ऐसा व्यक्ति जो देह पर ही जीता था वो भी देह को भूल गया क्योंकि उसे प्यार हो गया था, तुम्हारी सारी चिंताए, तुम्हारे सारे डर, और देह के प्रति तुम्हारा सारा तादात्म्य हवा हो जायेगा, अगर किसी चीज़ के ऊपर समर्पित हो पाओ तो।

यही प्रेम मार्ग है, यही समर्पण है, यही इश्क है।

ज़िन्दगी में किसी चीज के आगे सर झुका के तो देखो।

ज़िन्दगी में किसी को अपने से ज़्यादा बड़ा मान के तो देखो, ज़िन्दगी में तुम्हारी कुछ तो ऐसा हो जो तुम्हारी ज़िन्दगी से भी ज़्यादा कीमती हो, तब जीने का मज़ा आएगा! जीवन में तुम्हारे कुछ तो ऐसा होना चाहिए जिसकी खातिर तुम मरने को तैयार हो। और ऐसा अगर कुछ नहीं है तो बड़ा खोखला और बड़ा गरीब है तुम्हार जीवन।

अधिकांश लोगो से पूछा जाए कि क्या है जिसके लिए मर सकते हो, तो बहुत कुछ बता नहीं पाएंगे और बताएँगे भी तो कोई कह देगा खुद्दारी, कोई कह देगा अभिमान, कोई कह देगा शांति।

कुछ ऐसा नहीं होगा जो सृजनात्मक हो, कुछ ऐसा नहीं जिससे खुशबु आती हो, तुम्हारे जीवन में अगर कुछ हो विराट सुन्दर, सत्य!

आना-जाना सब छोटा रहे, ऐसा कि उसके आगे जीना-मरना, उठना-बैठना…

फिर कैसा देह भाव?

देह बड़ी छोटी चीज़ हो जाती है!


शब्दयोग सत्संग |  

संवाद देखें : फ्रेडी मर्करी के जीवन से प्रेरणा (On Bohemian Rhapsody by Freddie Mercury) || आचार्य प्रशांत (2019)

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