नव वर्ष का आरम्भ, आचार्य प्रशांत जी के संग || प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन (2019)

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हर साल की तरह इस बार भी ,
नव वर्ष का स्वागत अद्वैत परिवार ने
बोध की दिशा में कदम बढ़ाते हुए रखा,
और इस महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए
दूर-दूर से आये आचार्य जी के प्रेमी व शिष्यों ने भाग लिया,
जो भलीभांति जानते थे
कि नव वर्ष का आरम्भ उसके साथ होना चाहिए
जो प्राथमिक है, और एक आनंदमय व बोधपूर्ण जीवन के लिए
अति -आवश्यक है।


आचार्य जी के संग सत्संग

महोत्सव की शुरुआत आचार्य जी के स्वागत से हुई,
सभी श्रोताओं को अपने मन के प्रश्नों को
बीतते साल के साथ लय करने का
मंगलमय अवसर प्राप्त हुआ:

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सत्र से कुछ महत्वपूर्ण उक्तियाँ:

“जो अपनी कमियों से ग्रस्त होता है
वही दूसरों की कमियाँ ढूँढने निकलता है।

पकड़ना अपने-आप को अगर तुम्हें निंदा-रस बहुत प्यारा है।”

…………..

“खुद से हारे-हारे,
दुनिया फ़तह भी कर आये तो क्या है!

और तुम तो खुद से भी हारे हो और दुनिया से भी।

खुद से भी हारे हो,
दुनिया से भी हारे हो,
बड़े बेचारे हो।”

…………..

“जब तक संदेह उठ रहे हैं,
तब तक बोध में स्थापित
नहीं हुए हो।”

…………..

“हमें सत्य नहीं,
शब्दों से ज़्यादा मतलब है।”

…………..

“जो भी करो,
एक ध्येय के साथ करो,
इसका नाम है ध्यान। “

…………..

पूरा सत्र देखें: 
नव वर्ष सत्संग, आचार्य प्रशांत जी के संग || अद्वैत बोधस्थल से लाइव (31 दिसंबर 2018)


दीप प्रज्जवलन समारोह

संतो के वचनों को समयातीत शायद इसलिए ही कहा जाता होगा
क्योंकि उनके संग समय का पता ही नहीं चलता!

रमते-रमते, भजते-भजते, घड़ी की दोनों सुईं बारह पर थी,
और नए साल की शुरुआत
आचार्य जी के संग दीप प्रज्जवलन समारोह के साथ हुई,
समारोह की एक झलक:

 

पूरा समारोह देखें:
दीप प्रज्जवलन समारोह, अद्वैत बोधस्थल से लाइव (31 दिसंबर 2018)


~ और इस तरह अद्वैत परिवार ने आचार्य जी के सान्निध्य में व ईश्वर के आशीर्वाद के साथ नव वर्ष का स्वागत किया ~

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