जहाँ तुम थम जाओ, वहीं वो है

ख़ुदा थोड़े ही चाहिए तुम्हें, चैन चाहिए। ख़ुदा चैन नहीं देता, जहाँ चैन मिल जाये वहाँ ख़ुदा है।

जहाँ चैन मिल जाये वहाँ ख़ुदा जानें।

भगवान वो जो सुकून दे दे। जब सुकून मिल ही रहा हो भगवान कहीं और क्यों तलाशूँ?

सत्य की तलाश वास्तव में शांति की तलाश है।

सत्य और शांति को तुमने अलग-अलग किया तो सत्य सिद्धान्त मात्र बनकर रह जाएगा। सत्य, तुम्हें मिला या नहीं मिला, इसकी एक ही कसौटी है; शान्त हुए कि नहीं? चैन, सुकून आया कि नहीं? और चैन, सुकून तुमको जहाँ भी आ गया, जान लेना सत्य वहीं है। ना आगे बढ़ना, न पीछे जाना, न दाएँ, न बाएँ।

पचास अन्य पैमाने लगाते हैं, पचास अन्य तरीकों से परीक्षण करते हैं वो सारे तरीके झूठे हैं। सत्य तुम्हारे सामने है, इसका एक ही प्रमाण होता है तुम ठहर जाते हो, साँसें ही थम जाती हैं, समय थम जाता है। एक अपूर्व शांति तुम्हारे ऊपर उतर आती है और जहाँ तुम पर वो शान्ति उतर आए वहीं जान लेना सत्य है। अब और मत तलाशना। ना आगे बढ़ना, ना पीछे जाना, बिल्कुल ठिठक जाना, अवाक खड़े हो जाना, कहना यहीं है मिल गया है, ज़रा सा भी हिला तो चूक होगी।

कितना सरल तरीका है जाँचने का, जहाँ तुम थम जाओ, वहीं वो है।



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