तथ्यों मे जीना सीखो

ध्यान क्यों है? क्यूँकि तुम अशान्त हो। भक्ति क्यों है? क्यूँकि तुम अशान्त हो। सत्संग, अध्ययन, इनकी क्या आवश्यकता है? तुम अशान्त हो।

जो कुछ अभी तक करते आऐ हो, उसको ज़रा गौर से देखना शायद, वो सब, यूँ ही हैव्यर्थ।

ज़िंदगी के प्रति ईमानदार हो जाओ, तथ्यों मे जीना सीखो।

आध्यात्म तलवार होता है, जिससे अपना ही गला काटा जाता है।

मन की सारी दिशाओं को व्यर्थ जान लेना, ध्यान है।

आगे की बात बाद में। पहले अभी की बात।



पूरा लेख पढ़ें: आचार्य प्रशांत: ध्यान माने क्या?