प्रेम – एक अकारण घटना

हर शब्द के दो अर्थ होते हैं — “तुम किस तल पर हो बस ये देख लो” |

केवल जो संबंध संभव है वो प्यार का है |

अहमियत सिर्फ प्रेम के संबंध की होती है |

मन प्रेम से भागता रहे इसके लिए हमने रिश्ते गढ़ लिए हैं |

जहाँ कारण है वहाँ ‘प्रेम’ नही | सत्य के लिए एक नाम ये भी है, ‘अकारण’ 

एक ही संबंध होने दो और वो संबंध प्यार का हो |



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