मूढ़ कौन?

तरीका वहीँ अच्छा जो तरीके से मुक्त कर दे |

जो बोध्युक्त है वो बोध्युक्त है ही , वो कुछ करे या ना करे |

जड़ है ही वही जो सोचे की कल्याण हेतु विधियाँ लगानी पड़ती हैं

तुम कौन हो यही से निर्धारित होता है की तुम्हारे विश्वास की गुणवक्ता क्या है |

तुम जिसको मानते हो की है वही तुम हो और वही तुम्हारा जीवन है |

जिसने सत्य में श्रद्धा रखी वह सत्य ही हो गया और कुछ नहीं है भगवत्ता की प्राप्ति , और कुछ नहीं है मोक्ष | मोक्ष का अर्थ ही यही है की सत्य है, सत्य है |

एक मान्यता ही तो है तुम्हारी सारी बीमारी |

‘जागरण’ का अर्थ होता है जागृत होने वाले का विलय |

विधि का अर्थ होता है मन की कोई भी चालाकी |

आप सत्य की तरफ बढ़ रहे हो, आप सत्य की राह पर आगे चल रहे हो, अचानक कोई बीच में खड़ा हो जाता है, आपको रोक लेता है | आप देखते ही नहीं रूक कर के आप रोकने वाले के हाँथ मजबूत कर रहे हो, और रूक कर के आप चलने वाले के कदम कमजोर का रहे हो |

आप जो भी विधि अपनाते हो वर्तमान से बचने के लिए अपनाते हो | आप कहते हो अभी समझौता कर लेता हूँ ताकि आगे फायदा मिले | आप भूल जाते हो की अभी समझौता करके आप रोकने वाले को मजबूती दे रहे हो | अभी का पल ही तो है ना आपके पास इसी को आपने ‘बेच’ दिया, इसमें ही ‘समझौता’ कर लिया तो अब बचा क्या ?

या तो अभी होगा या कभी नहीं होगा |

अगर एक पल भी टाला तो किसको मजबूत किया ? टालने की प्रवृत्ति को और वही बीमारी है |

टालने का मतलब है भविष्य को पैदा करना |

आज तुम्हारी ताकत है, कल तुम्हारी कमजोरी है | मात्र आज जीत सकते हो कल पर टाल के नहीं |

जब प्यार मैं दिया जाता है, तो उसको समर्पण कहते हैं, आहुति कहते हैं और जब डर मैं दिया जाता है तो उसको क्या कहते है ? हफ्ता वसूली |

सहज ध्यान ही विधि है | उसके अतिरिक्त कोई दूसरी विधि नहीं है |

मूढ़ कौन ? जो सहज ध्यान की जगह पचास और चीजों को मान्यता देता हो | विधियों को, उपचारों को, उपायों को, भविष्य को, मानसिक गढ़नाओं को जो उन सब को मान्यता देता हो उसी का नाम मूढ़ है और जो सहज ध्यान में जीता हो वही योगी है | वही बुद्ध पुरुष है |



पूर्ण लेख पढ़ें: श्रद्धा है विश्वास की परिपूर्ति


 

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