सोचो ज़रूर पर सोचते ही मत रह जाओ|

भौतिकता का अर्थ है कि “अगर तुम हमसे आ कर कहोगे कि कुछ ऐसा है जिसका विचार नहीं किया जा सकता तो हम कहेंगे वो है ही नहीं|” भौतिकता का अर्थ फिर समझो, भौतिकता माने “जो भी कुछ है वो इन्द्रियगत है| हम सिर्फ भूतों को”, भूत माने क्या? भूत माने वो जो इन्द्रियों से परिलक्षित होता हो, “हम सिर्फ भूतों को मान्यता देते हैं| यानि कि हम सिर्फ मन और इन्द्रियों को मान्यता देते हैं, हम और किसी और सत्ता को मान्यता देते ही नहीं|”

भौतिकता है अपनी इन्द्रियों को महाआसन पर बिठा देना, भौतिकता है ये कहना कि सब से ऊपर मन और इन्द्रियां आती हैं|

भौतिकता एक काम बहुत अच्छा करती है, वो अविचार से तुम्हें विचार के तल पे ले आती है|

सोचो ज़रूर पर सोचते ही मत रह जाओ|

विचार ही जब गहराएगा तो अपनी सीमा देख लेगा, विचार ही जब गहराएगा तो निर्विचार में उतर जाएगा|

तथ्यों से आगे का जो रास्ता है न वो खुले आकाश की तरह है, वहाँ तुम्हें संदेह नहीं चाहिए श्रद्धा चाहिए और ये बहुत बड़ा अंतर है|

श्रद्धा का मतलब ही है कि इसके आगे तो तुम्हें बस राम भरोसे उड़ना है| विज्ञान भरोसे नहीं राम भरोसे, इसके आगे अब कोई रास्ता नहीं है जंगल है या आकाश है जैसे जाना है जाओ; राम का नाम लो आगे बढ़ो|

ज्ञान रुक गया है वही ज्ञान अहंकार बनेगा और श्रद्धाहीन रहेगा| जो ज्ञान लगातार बढ़ ही रहा है, बढ़ ही रहा है, वो ज्ञान विगलित हो जाएगा|

दुनिया में हर साधक का वक्तव्य यही होता है कि “मेरी मदद करो, मेरी मदद करो, मैं बहुत कष्ट में हूँ, मुझे बदल दो, और इतना कहे देता हूँ मुझे बदलने आओगे तो गर्दन काट दूंगा तुम्हारी|”



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