तलाश हमारी नित्य की ही है

स्थायी को ढूँढने में कोई बुराई नहीं है, पर गलत जगह ढूँढने में बहुत गड़बड़ है, धोखा है। जो स्थायी है, उसी स्थायी  को वेदांत ‘नित्य’ बोलता है। जो नित्य है, जो सदा है, उसको ढूँढने में कोई बुराई नहीं है, जो हमेशा है। पर, आप उसे गलत जगह ढूँढे, तो बड़ी गड़बड़ है। तलाश हमारी नित्य की ही है। उसी नित्य, उसी शाश्वत की तलाश को सुरक्षा कहा जाता है। सुरक्षा का यही अर्थ है – कुछ ऐसा मिल जाए, जो कभी ना छिने, उसी नित्य की तलाश।

तो, नित्य चाहिये सबको, ये हमारा स्वभाव है। नित्यता हम हैं, ये हमारा स्वाभाव है, उसको पाना चाहते हैं, उसमें कोई गड़बड़ नहीं है। पर गलत जगह पाना चाहते हैं, इसमें बड़ी चूक है।



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